फर्जी फास्टैग से करोड़ों के राजस्व नुकसान का खेल, STF ने दो भाइयों को किया गिरफ्तार
अन्य खबरे Jul 01, 2026 at 08:57 PM , 23नकली वाहन नंबर और कूटरचित दस्तावेजों से टोल व ऑनलाइन चालान से बच रहे थे आरोपी, लखनऊ में हुई कार्रवाई
लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फर्जी वाहन नंबर और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फास्टैग बनवाकर टोल प्लाजा से अवैध तरीके से आवागमन करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह फर्जी फास्टैग का इस्तेमाल कर टोल शुल्क, ओवरलोडिंग कार्रवाई और ऑनलाइन चालान से बचकर सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंचा रहा था।
एसटीएफ ने इस मामले में सीतापुर निवासी दो सगे भाइयों रियाज पुत्र सगीर और सिराज पुत्र सगीर को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी थाना लहरपुर क्षेत्र के पटकी टोला, मीरा टोला, जनपद सीतापुर के निवासी हैं।
फर्जी नंबर वाले फास्टैग से चल रहा था खेल
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि वाहन संख्या UP 32 ZN 8925 के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दूसरे वाहन नंबर MA 34 59455 का फास्टैग तैयार कराया गया था। इस फास्टैग का इस्तेमाल वर्ष 2024 से किया जा रहा था।
जांच में पता चला कि आरोपियों ने खैराबाद टोल प्लाजा, सीतापुर के पास मौजूद फास्टैग एजेंट के माध्यम से फर्जी आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराकर गलत वाहन नंबर पर फास्टैग जारी कराया था।
टोल और चालान से बचने के लिए अपनाया तरीका
पूछताछ में आरोपियों ने एसटीएफ को बताया कि वे आर्थिक लाभ लेने के उद्देश्य से फर्जी वाहन नंबर वाले फास्टैग का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित विभिन्न टोल प्लाजा से गुजरते समय ओवरलोड शुल्क और ऑनलाइन चालान की कार्रवाई से बचने का प्रयास किया जाता था।
एसटीएफ ने दर्ज मुकदमे की जांच में की कार्रवाई
यह मामला एआरटीओ लखनऊ दक्षिणी की तहरीर पर थाना सरोजनी नगर में दर्ज मुकदमा संख्या-119/2026 के तहत सामने आया था। इसमें बीएनएस की धाराओं 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना एसटीएफ को स्थानांतरित की गई थी।
यह कार्रवाई एसटीएफ लखनऊ के अपर पुलिस अधीक्षक सत्यसेन के पर्यवेक्षण और निरीक्षक प्रमोद कुमार वर्मा के नेतृत्व में की गई।
गिरफ्तार दोनों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया है। मामले में आगे की विवेचनात्मक कार्रवाई जारी है।



























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