अदभुत जनजाति: आदमखोर जनजाति

परिवेश , 1693

इस दुनिया में आदिवासियों की भी एक दुनिया बसती है जिन पर किसी भी देश का कोई कानून लागू नहीं होता है. इन बीहड़ जंगलों में इन आदिवासियों का अपना कानून , अपनी परम्परा और अपने नियम कायदे ही चलते है. अंडमान निकोबार में एक ऐसी ही जाती है सेन्टेनलीज जिनके बारे में अभी भी भारत सरकार को बहुत अधिक जानकारी नहीं है. इस आइलैंड पर जाने का मतलब है जीवन से हाथ धोना. मैं स्वयं इन आदिवासियों को दूर से देख चुका हूँ . उन दिनों मैं स्वयं अपनी 45 दिनों की अंडमान-- निकोबार के प्रवास में वहाँ गया था. तब वहां की छ आदिवासी जनजातियों को उन पर फिल्म बनाने के दौरान समीप से देखने का अवसर मिला था. लेकिन आज मै जिस आदिवासी जनजाति की बात करने जा रहा हूँ वह  दुनिया की सबसे ज्यादा खतरनाक इसलिए मानी जाती है क्योंकि इनका  यही मानना है कि ‘किसी दूसरे को मारे बगैर जिंदा रहने से अच्छा है खुद मर जाना’. जी हाँ यह जनजाति है मुर्सी  मुर्सी जनजाति के लोग साउथ इथियोपिया और सूडान बॉर्डर के ओमान वैली में रहते हैं. इन लोगों की कुल आबादी लगभग 10 हजार है. इस जनजाति के लोग अपनी परंपराओं को लेकर भी हमेशा चर्चा में बने रहते हैं . लोगों की बुरी नजर से बचने के लिए मुर्सी जनजाति की महिलाएं बाॅडी मोडिफिकेशन की प्रक्रिया के तहत अपने निचले होंठ में लकड़ी या मिट्टी की बनी डिस्क पहनती है. लड़कियां जब 15 साल की होती हैं तो उन्हें यह डिस्क पहना दी जाती है. लिप-प्लेट के नाम से चर्चित इस बाॅडी मोडिफिकेशन की वजह से यहां कि महिलाएं दुनिया भर के पर्यटकों की नजर में आकर्षण का केंद्र रहती हैं. अफ्रीका में अब बस मुर्सी, छाई और तिरमा नाम की जनजाति ही ऐसी बची हैं, जिनमें ऐसी परंपरा  आज भी शेष है.  ऐसा करने से उनकी सुंदरता कम हो जाती है और कम आकर्षक लगती है. 15 साल की उम्र होने पर लड़की की मां कबीले की दूसरी महिला साथियों के साथ मिलकर अपनी बेटी के निचले होंठ काट देती है जब घाव पक जाता है तब होंठ में लकड़ी का टुकड़ा फंसाया जाता है. फिर कुछ महीनों बाद उसमें 12 सेंटीमीटर की लिप डिस्क फंसा दी जाती है. यह डिस्क पूरी जिंदगी उसके होठ में लगी रहती है. मुर्सी जनजाति के लोग खुद को ताकतवर और मोटा बनाने के लिए गाय का खून पीते है. इसके आलावा मुर्सी जनजाति के मर्द आपस में डंडों से लड़ाई कराते हैं. इनका मानना है कि, जो शख्स लड़ाई जीतेगा उसे सबसे सुंदर पत्नी मिलेगी. मुर्सी जनजाति को एक चीज सबसे अलग और खतरनाक बनाती है. ये लोग आज भी अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार जीते है,  लेकिन सुरक्षा के लिए इनके पास ढेर सारे आधुनिक हथियार मौजूद होते हैं. यहां तक बताया जाता है कि इनके पास ए के - 47 बंदूक तक पाई जाती है. मुर्सी जनजाति के लोग ए के दृ47 के पुराने माॅडल को 8 से 10 गाय के बदले खरीदते हैं, जबकि इसका नया माॅडल 30-40 गाय देकर खरीदते हैं. इन हथियारों की सप्लाई इन्हें पड़ोसी देश सूडान और सोमालिया से की जाती है. इन्हीं सब बातों के चलते इस मुर्सी जनजाति को दुनिया की सबसे खतरनाक जनजातियों में से एक गिना जाता है. दरअसल मुर्सी जनजाति का मानना है की, किसी को मारे बगैर जिन्दा रहने का कोई मतलब नहीं है. इन्होने सैकड़ो लोगो की जान ली है, जो इनकी इजाजत के बगैर इनके समुदाय में आ गए थे. सन 2012 में इन लोगो से संपर्क करने की कोशिश की थी, जो असफल रही और लगभग 12 लोगो ने अपनी जिन्दगी खो दी, जो गाइड थे. तब से वहां की सरकार ने इनसे संपर्क करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया है. अब इनसे कोई नहीं मिल सकता है।

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