प्रदेश के शहद को मिलेगी नई पहचान, ‘काशी शहद’ ब्रांडिंग का आह्वान
अन्य खबरे Jan 07, 2026 at 05:32 PM , 134लखनऊ। प्रदेश में शहद उत्पादन को बढ़ावा देने, उसकी गुणवत्ता सुधारने तथा मौनपालकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से उद्यान निदेशालय के प्रेक्षागृह, लखनऊ में “एक दिवसीय मौनपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने दीप प्रज्वलन कर किया।
अपने संबोधन में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण तथा फसलों के परागण के माध्यम से कृषि उत्पादकता में वृद्धि करने का एक प्रभावी साधन है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश शहद उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, इसके बावजूद प्रदेश के शहद को अभी तक वह विशिष्ट पहचान नहीं मिल पाई है, जिसकी उसमें पूरी क्षमता है।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश से बाहर भेजा जाने वाला शहद विभिन्न नामों से बाजार में बिकता है, जिससे उत्तर प्रदेश के शहद की अलग पहचान नहीं बन पाती। इस स्थिति को बदलने के लिए उन्होंने प्रदेश के शहद को “काशी शहद” के नाम से ब्रांड करने का आह्वान किया, ताकि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उत्तर प्रदेश के शहद को नई पहचान मिल सके और मौनपालकों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि मूल्य संवर्द्धन और सशक्त ब्रांडिंग से ही किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि संभव है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बी.एल. मीणा ने की। उन्होंने कहा कि मौनपालन को एक संगठित, वैज्ञानिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने के लिए विभाग द्वारा प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और विपणन तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
इससे पूर्व उद्यान विभाग के निदेशक भानु प्रकाश राम ने कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय देते हुए प्रदेश में उद्यान विकास, मौनपालन की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण सत्र के मुख्य वक्ता के रूप में केंद्रीय मधुमक्खी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीबीआरटीआई), पुणे से आए विशेषज्ञ सरविन सिंह तरार ने वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन, रोग प्रबंधन, उच्च गुणवत्ता वाले शहद उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर मौनपालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के छह प्रगतिशील मौनपालकों को माननीय मंत्री द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित मौनपालकों में राजू सिंह (गोरखपुर), संजीव कुमार तोमर (गाजियाबाद), निमित सिंह (बाराबंकी), सुनील कुमार अहलावत (मेरठ), ओम प्रकाश मौर्य (हरदोई) तथा बृजेश कुमार वर्मा (लखनऊ) शामिल रहे। सम्मान समारोह के उपरांत इन मौनपालकों ने अपने अनुभव साझा कर अन्य मौनपालकों को प्रेरित किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लगभग 200 मौनपालकों एवं जनपदीय उद्यान अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में हाफेड के चेयरमैन नवलेश प्रताप सिंह, वित्त नियंत्रक अनिल कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक डॉ. सर्वेश कुमार, संयुक्त निदेशक डॉ. राजीव कुमार वर्मा सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे।



























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