लखनऊ के एस्ट्रोनोट शुभांशु शुक्ला के आईएसएस में सफल डॉकिंग पर सीएम और अखिलेश ने दी बधाई।

जनपत की खबर , 173

लखनऊ:भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला सहित चार अंतरिक्ष यात्री गुरुवार 26 जून की शाम 4:01 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पहुंच गए. करीब 28 घंटे के सफर के बाद वे अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे हैं. करीब 6 बजे स्पेस स्टेशन का हैच खुला और सभी एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष स्टेशन के अंदर प्रवेश कर गए. शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर पहुंचने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं. पहली बार 1984 में भारत के अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में चहलकदमी की थी. लखनऊ के शुभांशु की इस कामयाबी ने देशवासियों को गौरव का क्षण प्रदान किया है. इस बीच सीएम योगी ने शुभांशु के माता-पिता से अपने आवास पर मुलाकात कर शुभकामनाएं दीं. वहीं सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी शुभांशु को बधाई दी है.

स्पेसक्रॉफ्ट से शुभांशु ने ये कहा:अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने से पहले मिशन क्रू ने स्पेसक्राफ्ट से लाइव बातचीत की. भारतीय यात्री शुभांशु ने कहा कि सबको नमस्कार फ्रॉम स्पेस, यहां एक बच्चे की तरह सीख रहा हूं कि अंतरिक्ष में चलना और खाना कैसे है. लखनऊ निवासी शुभांशु शुक्ला की इस यात्रा को देखने के लिए उनके माता-पिता सीएमस कानपुर रोड पर पहुंचे. इस दौरान उनकी बड़ी बहन भी साथ में थीं. भारतीय समयानुसार शाम ठीक 4 बजकर 34 मिनट पर जैसे ही ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर अन्तर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से सफलतापूर्वक जुड़ा, लाइव प्रसारण देख रहे छात्र व शिक्षक रोमांचित हो गए. शुभांशु एक्सिओम-4 मिशन के पायलट के तौर पर मनुष्यों द्वारा बनाई गई सबसे उन्नत प्रयोगशाला ‘अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन’ पर सवार हैं और उनके साथ नासा की वरिष्ठ अंतरिक्ष यात्री डा. पेगी व्हिट्सन के साथ ही पोलैंड व हंगरी के सदस्य भी हैं.विद्यायल में रहा जश्न का माहौल :सीएमएस कानपुर रोड ऑडिटोरियम में जैसे ही शुभांशु का ड्रैगन कैप्सूल अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन से जुड़ने को तत्पर हुआ, लोगों में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा. अन्तरिक्ष यान की डाकिंग का सजीव प्रसारण देख रहे उनके माता-पिता व बहनों के साथ ही बड़ी संख्या में उपस्थित छात्र, शिक्षक, अभिभावक व प्रबुद्ध नागरिक इन अविस्मरणीय पलों को अपनी यादों में सहजने को बेचैन दिखे. अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन में प्रवेश करते ऑडिटोरियम तालियों की जोरदार गड़गड़ाहट, जय-जयकार के नारे व उत्साह व हर्ष की ध्वनियों से गूंज उठा.सितारों ने हमारे ही एक सदस्य को गले लगा लिया है. शुभांशु शुक्ला की कहानी हर एक बच्चे को प्रेरणा देती है कि यदि आपकी जड़ें गहरी हैं, तो आपके पंख आपको अंतरिक्ष तक ले जा सकते हैं. सीएमएस की कक्षाओं से लेकर अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन तक की शुभांशु की यह यात्रा अद्वितीय है. शुभांशु अब मात्र सीएमएस के पूर्व छात्र ही नहीं हैं अपितु अब वे पूरी पीढ़ी के लिए आदर्श बन गये हैं. -गीता गांधी किंगडन, सीएमएस निदेशक

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