हर्षोल्लास के साथ मनाई दो महापुरुषों की जयंती
लखीमपुर खीरी Dec 24, 2025 at 06:29 PM , 160लखीमपुर खीरी।हर्षोल्लास के साथ मनाई दो महापुरुषों की जयंती।पंडित मदनमोहन मालवीय एवं अटल बिहारी बाजपेयी जी के साथ ही तुलसी पूजन कार्यक्रम भी मनाया गया।विद्या भारती विद्यालय सनातन धर्म सरस्वती शिशु वाटिका में वंदना सभा में मां सरस्वती एवं माननीय अटल बिहारी बाजपेई, पंडित मदनमोहन मालवीय जी के समक्ष द्वीप प्रज्जवलन एवं पुष्पार्चन कर उनकी जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की संयोजिका बहन रमा मिश्रा ने दोनों महापुरुषों के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी 25 दिसम्बर 1924, 16 अगस्त 2018 भारत के दसवें प्रधानमन्त्री थे। उन्होंने प्रधानमंत्री का पद तीन बार संभाला है, वे पहले 13 दिन के लिए 16 मई 1996 से 1 जून 1996 तक। फिर लगातार 2 सासन, 8 महीने के लिए 19 मार्च 1998 से 13 अक्टूबर 1999 और फिर वापस 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमन्त्री रहे। वे हिन्दी कवि, पत्रकार व एक प्रखर वक्ता थे एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में एक थे, और 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य (पत्र) और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। महामना मदन मोहन मालवीय (25 दिसम्बर 1861 - 12 नवंबर 1946) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रणेता तो थे ही और इस युग के आदर्श पुरुष भी थे। वे भारत के पहले और अन्तिम व्यक्ति थे जिन्हें महामना की सम्मानजनक उपाधि से विभूषित किया गया। पत्रकारिता, वकालत, समाज सुधार, मातृ भाषा तथा भारतमाता की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वाले इस महामानव ने जिस विश्वविद्यालय की स्थापना की उसमें उनकी परिकल्पना ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षित करके देश सेवा के लिये तैयार करने की थी जो देश का मस्तक गौरव से ऊँचा कर सकें। मालवीयजी सत्य, ब्रह्मचर्य, व्यायाम, देशभक्ति तथा आत्मत्याग में अद्वितीय थे। इन समस्त आचरणों पर वे केवल उपदेश ही नहीं दिया करते थे अपितु स्वयं उनका पालन भी किया करते थे। वे अपने व्यवहार में सदैव मृदुभाषी रहे। विद्यालय की संचालिका श्रीमती हीरा सिंह ने पंडित मदनमोहन मालवीय जी की एक घटना को बताते हुए बताया कि पंडित मदन मोहन मालवीय ने जब कॉलेज की शिक्षा पूरी की, तब उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। शिक्षक की नौकरी में वेतन बहुत कम था, फिर भी उन्हें वह नौकरी करनी पड़ी। बाद में उनकी प्रतिभा, योग्यता और विद्वता की चारों तरफ चर्चा होने लगी। कालाकांकर के राजा रामपाल सिंह ने भी उनके विषय में बहुत कुछ सुन रखा था। उन्हें अपने समाचारपत्र के लिए सुयोग्य संपादक चाहिए था। उन्होंने मालवीय जी को बुलवाया और पूछा कि क्या वह उनके समाचारपत्र का संपादक बनना पसंद करेंगे। उन्होंने मालवीय जी के सामने 250 रुपये मासिक वेतन का प्रस्ताव रखा।अध्यापन कार्य में मालवीय जी को कम वेतन मिलता था, इसलिए उन्होंने उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। परंतु एक समस्या थी कि राजा साहब शराब के आदी थे और मालवीय जी को शराब से चिढ़ थी। उन्होंने कहा, ‘मैं संपादन कार्य जरूर करूंगा, परंतु मेरी शर्त यह है कि जब आप नशे में हों तो कृपया मेरे पास न आएं।’ राजा साहब ने मुस्कराकर हामी भर दी। इसके बाद मालवीय जी ने संपादन का कार्य लगन से शुरू कर दिया। एक दिन राजा साहब नशे में अपनी शर्त भूल गए और मालवीय जी के कार्यालय में जा पहुंचे। मालवीय जी ने तुरंत अपना त्यागपत्र दे दिया।जब राजा साहब का नशा उतरा तो उन्हें बहुत ग्लानि हुई। उन्होंने शर्त तोड़ने के लिए मालवीय जी से क्षमा याचना की, परंतु मालवीय जी बोले, ‘मैं क्षमा करने से अधिक अपने आदर्श को मानता हूं। मैं अब आपके यहां कार्य नहीं कर सकता।’ मालवीय जी के व्यक्तित्व का राजा साहब पर ऐसा असर पड़ा कि उन्होंने उसी दिन से शराब त्याग दिया। इतना ही नहीं मालवीय जी को इस फैसले से किसी तरह का आर्थिक नुकसान न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए राजा साहब वेतन के बराबर राशि उन्हें वकालत पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति के रूप में सहयोग किया। कार्यक्रम की संयोजिका बहन रमा मिश्रा ने 25 दिसंबर को तुलसी पूजन क्यों मनाते है और तुलसी पूजन कैसे करें इस पर प्रकाश डाला।अंत विद्यालय की संचालिका श्रीमती हीरा सिंह ने बताया कि हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है इसलिए इस पौधे की पूजा करने से सुख समृद्धि की कभी कमी नहीं होती हम हर साल 25 दिसंबर को तुलसी पूजन का कार्यक्रम मनाते हैं यह दिन तुलसी के धार्मिक और औषधीय महत्व को दर्शाता है इस पर्व को मनाने की शुरुआत 2014 में हुई थी देश के कई साधु संतों ने 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया तब से आज तक हर साल इस दिन तुलसी पूजन दिवस मनाया जाता है। कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ।































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