गंगा जी के धरती पर आने की कथा सुनाई

लखीमपुर खीरी , 158

(मनोज मिश्र)

धौरहरा खीरी। कस्बे में स्थित संत फकीर दास स्मारक मठ पर आयोजित कथा में कथा ब्यास व्याकरणाचार्य पंडित गरुड़ध्वज बाजपेई ने आठवें दिन उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए कहा कि राजा सगर ने अपने मृत पुत्रों को तारने के उद्देश्य से जमीन पर बैठकर मां गंगा को पृथ्वी पर लाने की प्रार्थना की थी लेकिन गंगा प्रसन्न नहीं हो सकी तब तीसरी पीढी के राजा भगीरथ ने खड़े होकर प्रार्थना की जबकि इससे पहले इनके दो पीढ़ियों ने गंगा को प्रसन्न करने के लिए खड़े होकर तपस्या की तब गंगा जी ने प्रसन्न होकर भगीरथ से कहा कि बरदान मांगों तो भगीरथ ने पृथ्वी पर बुलाने का निवेदन किया।तब गंगा ने भगीरथ से कहा कि पृथ्वी पर आने पर पापी लोग मुझमें स्नान करने लगेंगे।तब भगीरथ ने मां गंगा से कहा कि आपके निर्मल जल में साधु भी स्नान करेंगे जो लोग गृहस्थ जीवन में समर्पित होने के साथ धर्म-कर्म करने वाले भी साधु की श्रेणी में आते है।
तब मां गंगा ने भगीरथ को समझाया कि अगर आकाश मण्डल से जमीन पर आते वक्त मेरा बेग अगर नहीं रोक सके तो मै पाताल में जा सकती हूं। गंगा के कहने पर ही राजा भगीरथ ने महादेव शिव को प्रसन्न करने हेतु तपस्या शुरू की महादेव जी ने प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा तो भगीरथ ने गंगा को रोकने के लिए निवेदन किया शिव जी ने गंगा को रोकने के लिए अपने सर की जटाओं को कसकर बांध लिया और गंगा को समाहित कर लिया।

Related Articles

Comments

Back to Top