अन्नदाताओं के लिए मुसीबत बनी उर्वरक खाद किसानों के हितैषी नेता चमकेंगे वोट के समय
लखीमपुर खीरी Dec 02, 2025 at 05:50 PM , 125धौरहरा खीरी। सरकार चाहे जिस दल की रही हो सभी किसान हितैषी होने का दावा करती रही हैं। मोदी की सरकार द्वारा जब किसान सम्मान योजना को चालू किया गया तो किसानों को भी लगा कि शायद आप खुद किसानों का भला हो जाएगा और उन्हें खेती-बाड़ी के कामों में होने वाली तकलीफों से कुछ निजात मिलेगी लेकिन हर बार सरकारी नुमाइंदों की पहली प्राथमिकता में कथित रूप से शुमार किसान अपनी फसल बेचने से लेकर उर्वरक खरीदने तक इन सरकारी मुलाजिमों की मनमानी का शिकार होते हैं यह इसकी बानगी भर है।
जानकारी के मुताबिक केन्द्र से लेकर प्रदेश में चाहें जिस दल व पार्टी की सरकार बने सरकार से लेकर दरबार तक हर बार निशाने पर सिर्फ अन्नदाता किसान ही रहा क्योंकि अन्नदाता किसानों को खुश करने के लिए नेता चाहे जितने दावे करें लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती रही है। वर्तमान समय में अन्नदाता अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलिए के हाथों औने-पौने दामों पर विवश है क्षेत्र में कही भी खरीद केंद्र दिखाई नहीं दे रहे हां कागजों पर जरुर संचालित है अगर किसान किसी तरह खोज खाज कर खरीद केंद्र तक पहुंच गए तो वहां पर उन्हें तमाम श्री दुश्वारियां का सामना करना पड़ता है और उनके मॉल में भी तरह-तरह की कमी निकालकर दौड़ाया जाता है जिससे थक हार कर वह अपना माल होने में दलालों के हाथ बेच देता है साथ ही दूसरी तरफ किसान को खेतों में डालने के लिए विभिन्न प्रकार की उर्वरक खादे आदि समितियों की जगह निजी दुकानदारों से ऊंचे दरों पर खरीदना पड़ रहा है। बीते पूरे सीज़न में यूरिया के लिए लोग लाईन में भूखे प्यासे लगे रहे और तो और इस समय में भी अन्नदाता निजी दुकानों से 500 रुपए में यूरिया खाद के साथ सल्फर पैकेट खरीदने को मजबूर हो रहा है। धौरहरा कस्बे की दुकान से खरीदी गई यूरिया लेकर जा रहे किसान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है इस प्रकार के वीडियो जिले के पहले वोट और नोट लेने वाले नेताओं से लेकर अधिकारियों की कारगुजारियों की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करने के लिए काफी है।






_page-0001.jpg)
























Comments