“स्वप्न से भी बदल झूठ है यह संसार सत्य केवल परमात्मा है : महात्मा दशरथ दास जी”

लखीमपुर खीरी , 80

सकरघटा लखीमपुर। स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में सकरघटा, करौली, में चल रहे सत्संग कार्यक्रम के तीसरे दिन बोलते हुए महात्मा दशरथ दास ने कहा, यह संसार अज्ञान की अवस्था में सत्य जैसा दिखाई देता है लेकिन है तो यह झूठ परन्तु यथार्थ ज्ञान न होने के कारण यह सब सत्य प्रतीत होता है और जब भगवान असीम कृपा करके सदगुरु रूप में ज्ञान देते हैं तब यह स्पष्ट देखने को मिलता है कि नही यह संसार सत्य नही बल्कि सब असत्य है, “जेहि जाने जग जाए हेराई, जागे जथा सपन भ्रम जाई” ।  जैसे जब ज्ञान रूपी प्रकाश रस्सी रूपी संसार पर पड़ता है तब दिखाई देता है कि संसार बद से भी बदतर झूठा है।  उन्होंने कहा सदगुरू रूप में भगवान अपने समर्पित शिष्यों को तीन उपलब्धि देता है। पहला उपलब्धी के रूप में वह अपने शिष्यों को असत्य से सत्य की ओर लेकर चलता है, दूसरा वह अपने शिष्यों को ममता मोह रूपी अंधकार से निकाल कर दिव्य चेतन रूपी प्रकाश की ओर ले चलता है एवं तीसरा उपलब्धि के रूप में वह अपने शिष्यों को मृत्यु से निकालकर अमरता प्रदान करता है। अगर यह तीन उपलब्धि मिल रहा हो तो समझ लेना चाहिए कि सामने वाला गुरु सच्चा सदगुरू भगवान है।
               सत्संग के पश्चात रोहित दास का भजन हरि भजले राम भजले हरि भजने का मौका है, सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गए।

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