दुधवा मुख्यालय का बसंतपुर के ग्रामीणों ने किया घेराव बाघ के हमलों से पीड़ित है ग्रामीण

लखीमपुर खीरी , 134

 विश्वकांत त्रिपाठी‌ वरिष्ठ पत्रकार 

पलिया कलां लखीमपुर खीरी।थाना क्षेत्र के ग्राम बसंतापुर खुर्द में लगातार बाढ़ के‌ हमलों से परेशान ग्रामीणों ने‌ दुधवा‌ मुख्यालय का‌ घेराव कर वन‌ विभाग के विरुद्ध नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया साथ‌ ही हमलें में मारे गए मृत पशु के शव को भी लाद कर‌ मुख्यालय गेट पर‌‌ लाये।वन कर्मियों ने अपनी नाकामी और गैर जिम्मेदारी के बचाव को बचाव के लिए भारी पुलिस बुला ली।
     वन विभाग द्वारा बाघ को खदेडने तथा पकड़ने का कोई ठोस उपाय न किए जाने से नाराज ग्रामीणों ने वन विभाग के साथ प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि आज लोग अपने घरों में सुरक्षित नहीं है घर में बढ़ मवेशियों को हिंसक जानवर मारकर खा रहे हैं और वन विभाग मूक बना है।
,वहीं यदि बाघ इत्यादि हिंसक जानवरों पर कोई‌ हमला करता है तो पुलिस‌और वन विभाग उसके पूरे परिवार को परेशान फर्जी मुकदमे लाद देता है, और फर्जी मुकदमे लकड़ी चोरी के आज कैसे काट देता है बफर जोन के लोग बाघ के हमले से परेशान हैं उन्होंने बाग पकड़वाने की मांग करते हुए जोरदार प्रदर्शन कर अपना गुस्सा बना अधिकारियों पर फोड़ा,और कहा कि इस सरकार में न किसान सुरक्षित और न ही किसानी।
    आये दिन किसान और पशुपालक हिंसक जीवों पर गांव में घुसकर घरों तथा घरों के बाहर बंधे पशुओं को हमला कर उनको निवाला बना‌रहे हे और उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।
इसके चलते गुरुवार को बसंतपुर के ग्रामीणों ने अपना गुस्सा और नाराजी प्रकट कर ग्रामीणों ने दुधवा टाइगर मुख्यालय के गेट पर जाम‌लगा दिया। 
      गांव वालों ने बताया कि अब तक बसंतपुर क्षेत्र में बाघ दर्जनों अटैक कर चुका है जिसमें लगभग आधा दर्जन से अधिक पशु मारे गए हैं और दर्जनों जख्मी हुए हैं मुआवजे की बात छोड़ दीजिए कोई वनकर्मी हाल तक पूछने नहीं जाता है।
   बछड़े के शव के साथ पहुंचे सैकड़ो ग्रामीण डेढ़ घंटे से अधिक समय से दुधवा मुख्यालय  गेट पर रहे खड़े रहे, दुधवा टाइगर रिजर्व मुख्यालय का गेट अंदर से किया गया बंद कर लिया ताकि ग्रामीण ना पहुंच पाए।
       सुरक्षा के दृष्टिगत काफी पुलिस कर्मी मौके पर तैनात रहे और ब्राह्मण नारेबाजी करते रहे नतीजा सिफर रहा अर्थात पुलिस ने ग्रामीणक समझा बूझाकर मौके से हटा दिया, साथ ही वन अधिकारियों ने बाघ पकड़वाने का अस्वासन दिया तब ग्रामीण माने।

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