स्वच्छता अभियान को ठेंगा दिखाता नगर पालिका परिषद लखीमपुर

लखीमपुर खीरी , 245

काशीराम कालोनी की स्वच्छता व्यवस्था की कलई खोलता लालपुर स्टेडियम भसडिया रोड


एनजीटी के आदेश को ठेंगा... जहां देखो वहीं कचरा


लखीमपुर-खीरी।साफ-सफाई हमारे समाज का हमेशा से हिस्सा रही है। फिर चाहे बात कलियुग की हो, त्रेता की या फिर उससे भी पहले की। शास्त्रों के अनुसार, देवी लक्ष्मी व अन्य भगवान वहीं वास करते हैं, जहां स्वच्छता होती है।
स्वच्छता अच्छे स्वास्थ्य का पर्याय है लेकिन आज हम इतने आलसी हो चुके हैं कि अपने आस-पास लगे कूड़े के ढ़ेर आदि के बारे में सोचना भी नहीं चाहते। आज इधर-उधर कूड़ा फेंककर हम कईं बीमारियों को न्यौता दे रहे हैं।
भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की प्राथमिकता में भी स्वच्छता थी लेकिन ज़रा अपने आसपास देखिए, क्या आपका मोहल्ला, शहर, राज्य, देश कितना साफ है?
हालांकि वर्तमान सरकार मे खद्दर धारी हाथ में झाड़ू लेकर कचरा साफ करते हुए देखे जा सकते हैं लेकिन जमीनी सच्चाई क्या है वो सभी लोग जानते हैं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गाँधी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने हेतु स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी। स्वच्छ भारत अभियान या स्वच्छ भारत मिशन 2014, भारत सरकार द्वारा खुले में शौच को खत्म करने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार के लिए शुरू किया गया एक देशव्यापी अभियान है लेकिन कुछ पालिका प्रशासन ऐसे भी हैं, जो केवल स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए ही अपने शहर व गलियों में साफ-सफाई कराते हैं फिर पूरे साल शहर व नगर की स्थिति क्या है, इस पर ध्यान देना भी उचित नहीं समझते। कूड़े की समस्या हमारे देश में बहुत बड़ी है। जैसे-जैसे भारत की आबादी बढ़ रही है, वैसे-वैसे प्रतिदिन कूड़ा निस्तारण की समस्या भी बढ़ रही है। प्रदेश के कई शहर व नगर ऐसे हैं, जहां कूड़े के ढेर उस नगर की सुंदरता पर एक दाग जैसे लगे पड़े हैं। इनका ठोस निस्तारण तभी हो पाएगा, जब उस शहर के प्रशासन की इच्छा शक्ति प्रबल होगी। ऐसा ही एक शहर है उत्तर प्रदेश का लखीमपुर-खीरी, जहां शहर से सटे लालपुर स्टेडियम भसडिया रोड स्थित कांशीराम कालोनी की मुख्य सड़क पर कूड़े के ढेर ऐसे लगे हैं, मानो इस सड़क की पहचान ही यही है।
और बड़ी बात यह है कि शहर में लगे कूड़े के अधिकतर ढेर अवैध हैं और नगर पालिका परिषद लखीमपुर प्रशासन इस समस्या का स्थाई समाधान करने में असफल हो रहा है। 
शहर से सटे लालपुर स्टेडियम भसडिया रोड  जो कि मुख्य रोड़ में से एक है जो जल निगम मुख्यालय आफिस का रास्ता भी है उस सड़क पर भी कूड़े के ढ़ेर लगे हुए हैं हालांकि पिछले कुछ दिनों से नहीं, बल्कि पांच से भी अधिक वर्षों से।
उक्त सड़क पर काशीराम कालोनी के वाशिंदे ही यहीं ऑन रोड़ लाकर फेंकते हैं।
क्या पालिका प्रशासन लखीमपुर-खीरी को नहीं पता कि यहां कूड़ा कौन फेंक रहा है? क्या नगर पालिका नहीं चाहता कि गंदगी यहां से हटे? शायद चाहता है लेकिन कार्य करने के लिए इच्छा शक्ति भी तो होनी चाहिए! 
अब ज़रा सोचिए छुट्टा जानवर व गौवंश उस कूड़े कचरे को भोजन की तलाश में उसे खा रहे हैं उनके स्वास्थ्य का अंदाजा लगाया जा सकता है।
लोगों व गौवंश के‌ स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पालिका प्रशासन की प्राथमिकता उन कूड़े के ढेर को हटवाना चाहिए‌ किन्तु ऐसा नहीं है।
मैंने स्वयं स्थानीय प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में इसे लेकर लेख लिखे जो  प्रमुखता से प्रकशित भी हुए, सिटिज़न रिपोर्टर बन इन कूड़े के ढ़ेर की रिपोर्टिंग की, जिसमें नगर पालिका प्रशासन से इन समाज के दुश्मन कूड़े के ढ़ेरो को यहां से मुक्त कराने की अपील की लेकिन अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ा।
इन्हीं कूड़े के ढ़ेर के बीच आसपास के जानवर, जैसे गौवंश व कुत्ते आदि अपना खाना ढूंढने आते हैं। बंद पन्नियों में खाना देख वे उसे पन्नी समेत ही खा जाते हैं और कई बार मैंने कुत्ते व गाय वहां मृत अवस्था में देखे भी हैं। शायद उनके मरने की वजह यह कूड़े का ढेर व इसमें पड़ी पन्नियां रही होंगी जिन्हें खाना समझकर उन बेजुबानों ने खाया होगा और वह पन्नी उनकी आंतों में जम गई होंगी, जिसका परिणाम उनकी मौत रही।
अतः नगर पालिका प्रशासन के चैयरमेन ईरा श्रीवास्तव व ईओ संजय कुमार की यह नज़अंदाज़ी ना केवल हम इंसानों के लिए खतरा बन रही है, बल्कि अब बेजुबान जानवर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। मैं पुनः अपने इस लेख के माध्यम से नगर पालिका प्रशासन से यह अपील करना चाहूंगा कि वृहद स्तर पर समस्त काशीराम कालोनी वासियों को घर में ही कूड़ा निस्तारण के तरीके बताएं, आवश्यकता पड़े तो इसे अनिवार्य करें व साथ ही शहर की मुख्य सड़कों पर लगे ये कूड़े के ढेरों को सदा के लिए हटाया जाए ताकि नगर व कस्बा कूड़ा मुक्त हो और यह दाग हमारे शहर से हटे।

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