भ्रष्ट लेखाकार के इशारों पर चल रहे बिजुआ ब्लॉक के स्कूल

लखीमपुर खीरी , 186

(हरिशंकर मिश्र)

 लखीमपुर खीरी। सरकार बेसिक स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का स्तर ऊंचा उठाने के लिए प्रति वर्ष एक भारी भरकम बजट खर्च करती है लेकिन फिर भी बेसिक में पढ़ने वाले छात्रों की पढ़ाई महज खानापूर्ति बनकर रह गई है। शिक्षा का भारी भरकम बजट बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदाराें की जेबों में समा जाता है।
एक समय था जब सीमित संसाधनों के होते हुए भी हिंदी स्कूलों से पढ़कर बच्चे आईएएस पीसीएस डॉक्टर इंजीनियर आदि बनते थे परंतु जब सरकार ने स्कूल की बिल्डिंग दिया इसमें भी जिम्मेदारों ने बनवाने मेंटेनेंस आदि में खूब रकम बटोर रहे। इसके बाद यूनिफॉर्म जूता मोजा में भी जमकर धांधली चल रही थी तब सरकार ने उसका पैसा सीधे खातों में डालना शुरू किया। बच्चों के एमडीएम में भी जिम्मेदार रकम खा रहे हैं बच्चों को अच्छी शिक्षा के नाम पर अफसर मालामाल हो रहे हैं चाहे एमडीएम का मामला हो चाहे अन्य कोई मद का हो जो शिक्षक स्कूल में पढ़ाते हैं और बच्चों को अच्छी शिक्षा देते हैं उनको यह भ्रष्ट अफसर आए दिन परेशान किया करते हैं। 
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक ब्लॉक बिजुआ के बीआरसी कार्यालय में जब से बीआरसी कार्यालय में संविदा पर तैनात इरशाद अहमद की तैनाती हुई है तब से खुलेआम हर काम के बदले शिक्षकों से धन उगाही होती है यहां तक विद्यालयों के ऐसे शिक्षक हैं जो अपने घर में बैठकर अपना काम करते हैं परन्तु उसका वेतन हर माह बीआरसी कार्यालय की कृपा से आहरित हो रहा है जबकि जिले की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निरीक्षण में कई स्कूलों में खामियां मिली लेकिन जांच के नाम पर खाना पूर्ति करके मात्र नोटिस देखकर विभाग उन्हें क्लीन चिट दे देता है। ब्लॉक बिजुआ में तमाम स्कूल जिनका रजिस्ट्रेशन भी नहीं है उसमें छात्र पढ़ रहे हैं उनका नाम इरशाद लेखाकार ने क्षेत्र के प्राइमरी स्कूलों में नाम दर्ज करवा दिया और इन छात्रों का एमडीएम गुरुजी एवं ग्राम प्रधान खा रहे हैं और कुछ ऐसा बीआरसी कार्यालय में इरशाद को जाता है। जो बिना रजिस्ट्रेशन स्कूल चलाते हैं उनकी इस लेखाकार से सांठगांठ है जिससे जब कोई जांच करने जाता भी है तब लेखाकार इन स्कूल चलाने वालों को सचेत कर देता है जिससे बिना रजिस्ट्रेशन स्कूल चलाने वाले बच जाते हैं। लेखाकार इरशाद अहमद का एक माह का मानदेय दस हजार एक सौ रुपए मात्र है फिर भी इसका शहर में आलीशान मकान और अच्छी गाड़ी से चलता है और अपनी पत्नी को जिला पंचायत का चुनाव लड़ने के लिए प्रचार प्रसार करता दिखाई देता है। जो मास्टर कभी देर से विद्यालय में जाकर महज खाना पूर्ति करते हैं वह इसके वफादार बताये जाते हैं जो खंड शिक्षा अधिकारी बीआरसी में आता है कमाऊ पूत होने के कारण इसका प्रिय हो जाता है वैसे भी इस विभाग में अफसर की कम बाबुओं की ज्यादा चलती है। गांव के गरीब बच्चों का भविष्य और सरकारी धन की बरबादी होकर बंदरबांट हो रहा है।
 मालपुर में विद्यालय सड़क पर बना है उसमें अवैध रूप से इस  लेखाकार ने दुकानें बनवाकर उनसे माहवारी भी वसूलता है। अगर इस लेखाकार के कारनामों की ईमानदारी पूर्ण जांच कराई जाए तो शायद लेखाकार इरशाद जेल में होगा।

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