गन्ने के बाद अब केले ने तोड़ी किसानों की कमर खरीद फरोख्त में बिचौलियों का बोलबाला मार्केट में केला ₹50 दर्जन किसान जोत रहे केले की खड़ी फसल

लखीमपुर खीरी , 376

केके शुक्ला/हरिशंकर मिश्र 

लखीमपुर खीरी। वर्तमान में जहां केला बाजार में 40 से 50 रुपए दर्जन बिक रहा है तो वहीं किसानों को केले की फसल का उचित मूल्य तक नहीं मिल पा रहा है। सभी जानते है कि यूपी के सबसे बड़े जनपद लखीमपुर खीरी को चीनी का कटोरा अर्थात सबसे बड़ा उत्पादक केंद्र कहा जाता है। यहां का अधिकांश किसान गन्ने की फसल पर निर्भर करता है और गन्ने की फसल को ही प्रथम वरीयता देता है। मगर धीरे धीरे मिलों द्वारा गन्ना भुगतान से आजिज परेशान किसानों का मोह गन्ने की खेती से भंग होता दिखाई दे रहा है तब किसान विकल्प के रुप में कई अन्य फसलों में हाथ डालकर अपनी आय का संसाधन बनाने में जुटे हुए हैं। जिस कारण  अधिकतर किसान केले की फसल को वरीयता देकर उस पर जोर आजमाइश कर रहा है। किसानों द्वारा बताया गया कि हम लोग गन्ने की खेती को छोड़कर केले की फसल को इसलिए लगाया क्योंकि केले की फसल में गन्ने से कहीं ज्यादा लाभकारी है तो वहीं केले की फसल को लेने के लिए काश्तकार तक व्यापारी स्वयं खेतों तक आते है और गाड़ी में फसल लादने के तुरंत बाद नकद भुगतान कर देते है। इसलिए केले की फसल हम सभी के लिए ज्यादा कारगर साबित हो रही है मगर इस बार केले की फसल ने भी हम लोगों (किसानों) की कमर तोड़ कर रख दी है क्योंकि पिछले बार केले का रेट ₹2000 से ₹2500 प्रति कुंतल था जिससे किसानों को अच्छा लाभ हुआ था।
हुआ कुछ यूं कि पिछले साल का रेट देखकर इस बार किसानों ने भारी मात्रा में केले की फसल को उगाया मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। किसानों द्वारा मेहनत कर उगाई गई केले की फसल इस बार कोई देखना भी पसंद नहीं कर रहा है। जहां पिछली बार केला ₹2500 प्रति कुंतल बिका तो वहीं इस बार वहीं केला ₹400 से ₹500 प्रति कुंतल तक भी कोई नहीं ले रहा है। केले का उचित मूल्य न मिल पाने के कारण किसानों के माथे पर चिंता की सिमटन साफ तौर पर देखी जा सकती है। घटिया रेट मिलने की वजह से कई किसानों ने तो खड़ी केले की फसल को जोत दिया और उन्होंने बताया कि केले का भाव तो इस हद तक गिर गया है कि अब तो लागत निकालना ही मुश्किल है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि मेहनत कर किसानों द्वारा उगाई गई केले की फसल का उचित मूल्य दिया जाए ताकि केले की खेती को और बढ़ावा मिल सके। बताया जाता है कि इस खेल में बिचौलियों की काफी अच्छी भूमिका है। हालांकि उनकी भूमिका किसानों की हर फसल में ही रहती है।

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