*पिछले छः वर्षों में बिजली की दरों में नहीं हुई कोई बढ़ोतरी, जून-2026 का FPPPA केवल अस्थायी समायोजन : UPPCL*
लखनऊ May 30, 2026 at 08:32 PM , 4*फरवरी 2026 में यह दर 10% था और मार्च 2026 में –2.42%*
*फ्यूल एवं पावर परचेज अधि भार बढ़ा है बिजली का रेट नहीं, पिछले 6 वर्षों में बिजली टैरिफ में कोई वृद्धि नहीं*
लखनऊ, 30 मई 2026
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने स्पष्ट किया है कि जून-2026 के लिए प्रस्तावित 10 प्रतिशत फ्यूल एवं पावर परचेज प्राइस एडजस्टमेंट (FPPPA) को बिजली दरों में वृद्धि के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से गलत एवं भ्रामक है।
UPPCL ने कहा है कि प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं के लिए लागू मूल बिजली दरों (टैरिफ) में पिछले लगभग छह वर्षों से कोई वृद्धि नहीं की गई है। जून-2026 के लिए प्रस्तावित 10 प्रतिशत FPPPA बिजली की दरों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि विद्युत नियामक आयोग के प्रावधानों के अनुसार लागू होने वाला एक अस्थायी एवं परिवर्तनीय अधिभार है, जो हर माह वास्तविक विद्युत क्रय लागत के आधार पर घटता-बढ़ता रहता है।
FPPPA का निर्धारण उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा अधिसूचित एमवाईटी रेगुलेशन-2025 के तहत किया जाता है। यह किसी माह से तीन माह पूर्व की अवधि में विद्युत क्रय की वास्तविक लागत तथा आयोग द्वारा अनुमोदित लागत के बीच अंतर के आधार पर निर्धारित होता है। इसलिए इसकी दर प्रत्येक माह अलग-अलग हो सकती है तथा कई बार यह ऋणात्मक (नेगेटिव) भी हो जाती है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलती है।
उदाहरण के तौर पर फरवरी-2026 में FPPPA 10 प्रतिशत था, जबकि अगले ही माह मार्च-2026 में यह घटकर ऋणात्मक (-2.42 प्रतिशत) हो गया था। इसी प्रकार अप्रैल-2025 से जून-2026 के दौरान FPPPA कई बार धनात्मक और ऋणात्मक दोनों स्थितियों में रहा है। इससे स्पष्ट है कि यह कोई स्थायी शुल्क नहीं है और न ही बिजली दरों में वृद्धि का संकेत है।
जून-2026 के लिए प्रस्तावित 10 प्रतिशत FPPPA का प्रमुख कारण माननीय अपीलीय अधिकरण (APTEL) के आदेशों के अनुपालन में किए गए कुछ विशेष भुगतान हैं। इनमें एनटीपीसी को ऐश ट्रांसपोर्टेशन मद में देय एरियर तथा केंद्रीय पारेषण उपयोगिता (CTU) को पूर्व वर्षों के लंबित देयों का भुगतान शामिल है, जिसके कारण विद्युत क्रय लागत में अस्थायी वृद्धि हुई है।
UPPCL ने उपभोक्ताओं एवं आमजन से अपील की है कि वे FPPPA को बिजली की दरों में बढ़ोतरी के रूप में न देखें। यह एक नियामकीय व्यवस्था है, जो रहती है और भविष्य में परिस्थितियों के अनुसार पुनः कम अथवा ऋणात्मक भी हो सकती है।निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार एवं ऊर्जा विभाग उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ विद्युत उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं तथा बिजली दरों में किसी प्रकार की नई वृद्धि नहीं की गई है।






























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