*डॉ. राजेश्वर सिंह की 58वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा संपन्न, आस्था और सेवा का बना दिव्य संगम*
लखनऊ May 18, 2026 at 08:05 PM , 6*8500 से अधिक श्रद्धालुओं को 150 से अधिक बसों के माध्यम से डॉ. राजेश्वर सिंह ने कराए श्रीरामलला के दर्शन*
*डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल — रामरथ यात्रा के माध्यम से संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रधर्म का संदेश*
*डॉ. राजेश्वर सिंह का संकल्प — सरोजनीनगर में निरंतर प्रज्ज्वलित रहे रामभक्ति और सामाजिक समरसता की ज्योति*
*लखनऊ।* “राम केवल आस्था नहीं, भारत की आत्मा हैं और सेवा ही वह मार्ग है, जो समाज को संस्कारों से जोड़ता है।” इन्हीं भावनाओं के साथ सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा आयोजित 58वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा हनुमानपुरी, अमौसी रोड, सरोजनीनगर से सफलतापूर्वक संपन्न हुई। 27 सितंबर 2022 से प्रारंभ हुई यह पावन यात्रा श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कराने के साथ-साथ समाज को धर्म, संस्कृति, सेवा और सामाजिक समरसता के सूत्र में जोड़ने का एक प्रेरणादायी अभियान बन चुकी है।
डॉ. राजेश्वर सिंह की प्रेरणा और मार्गदर्शन में संचालित इस पुण्य यात्रा में 150 से अधिक बसों के माध्यम से अब तक 8500 से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंचकर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने सरयू स्नान किया। इसके साथ ही हनुमानगढ़ी के दर्शन प्राप्त किए। इसके बाद प्रभु रामलला का आशीर्वाद लिया। सरोजनीनगर परिवार के बुजुर्गों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने पूरी यात्रा को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना के महोत्सव का स्वरूप प्रदान किया।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भोजन, जलपान, चिकित्सा सहायता एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष प्रबंध किया गया। गीता और प्रसाद भी उपलब्ध कराया गया। पूरी यात्रा में सेवा भाव और अनुशासन का अद्भुत समन्वय देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं के अनुभव को और अधिक दिव्य एवं स्मरणीय बना दिया।
डॉ. राजेश्वर सिंह के विचारों के अनुरूप रामरथ यात्रा का उद्देश्य केवल दर्शन कराना नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग, सेवा और राष्ट्रधर्म के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना भी है। यह यात्रा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपरा और संस्कारों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन रही है। उनके सांस्कृतिक एवं सामाजिक सरोकारों के संकल्प के तहत यह अभियान समाज में आध्यात्मिक जागरण, सामाजिक समरसता और सेवा भाव को निरंतर सशक्त कर रहा है।
सरोजनीनगर परिवार के लिए यह यात्रा अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सेवा और आध्यात्मिक जागरण का जनआंदोलन बन चुकी है। प्रभु श्रीराम की कृपा सभी श्रद्धालुओं पर बनी रहे तथा आने वाले वर्षों में भी यह यात्रा आस्था और संस्कारों की अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करती रहे — यही मंगलकामना व्यक्त की गई।
































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