*मंच पर उतरीं ईशा-मीशा, अंजुल-पीयूष व गोविंद -रोशनी की जोड़ी*

लखनऊ , 19

*‘कथक संध्या’ में युगल नृत्यांजलि*

 

लखनऊ, 13 मई। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में आज शाम बिरजू महाराज कथक संस्थान द्वारा आयोजित कथक संध्या श्रृंखला के अंतर्गत युगल नृत्यांजलि कार्यक्रम में तीन कथक जोड़ियां मंच पर थीं।

गुरु अर्जुन मिश्र व सुरभि सिंह की शिष्या द्वय रतन सिस्टर्स ईशा और मीशा रतन की जीवंत संगीत भरी प्रस्तुति का आरंभ रुद्राष्टकम से हुआ। फिर तीन ताल में पारंपरिक कथक का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए समापन राग मेघ और तीन ताल में निबद्ध 'बादल रे अरज गरज....' बंदिश में भाव पक्ष और अभिनय को जीते हुए वातावरण को अत्यंत भावपूर्ण बना दिया। इस प्रस्तुति में तबले पर राजीव शुक्ला, सारंगी पर मनीष तथा हारमोनियम पर गायन कर रहे आरिफ ने उम्दा संगत की। पढ़ंत और मार्गदर्शन सुरभि सिंह का रहा।

इससे पहले अंजुल बाजपेई एवं पीयूष पाण्डेय ने “डमरू हरकर बाजे” रचना से भगवान शिव की आराधना करते हुए परम्परागत तीनताल पर आधारित शुद्ध नृत्य का सुंदर प्रदर्शन किया। कार्यक्रम काझं समापन “बादल गरज नवघोर” रचना से किया गया। यहां लयकारी एवं भावाभिव्यक्ति विशेष आकर्षण रही।

सम्पूर्ण कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी साधना, तालबद्धता एवं भावाभिव्यक्ति से दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति गोविंद चौधरी एवं रोशनी प्रसाद द्वारा दी गई। उन्होंने “नमामी शमीशाम” स्तुति से आरंभ करते हुए भगवान शिव को समर्पित भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। तत्पश्चात उन्होंने 15 मात्रा की जटिल पंचम सवारी ताल में अपनी तकनीकी दक्षता का परिचय दिया। समापन में “श्री राधे रानी” की प्रस्तुति के माध्यम से राधा-कृष्ण की मधुर छेड़छाड़ का सजीव एवं मनोहारी चित्रण दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया। कलाकारों के बीच सामंजस्य, संवाद और तालमेल ने मंच पर एक अद्वितीय सौन्दर्य का सृजन किया, जिससे दर्शको को कथक की नृत्य-शैली का एक अलग और आकर्षक आयाम देखने को मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य संजय सिंह व संस्थान की अध्यक्ष डॉ. कुमकुम धर ने किया। संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ.मिथिलेश तिवारी तथा संस्थान की सदस्य सुश्री सुरभि सिंह भी उपस्थित रहीं। मंच संचालन देवेंद्र सिंह जी द्वारा प्रभावी ढंग से किया गया।

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