ईंधन बचत और स्वदेशी अपनाने की मुहिम को योगेंद्र उपाध्याय का समर्थन, वर्चुअल मीटिंग पर जोर

लखनऊ , 11

प्रधानमंत्री की पहल पर एक्शन में यूपी सरकार, मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने लिया ईंधन बचत का संकल्प

वैश्विक संकट के बीच स्वदेशी और ईंधन बचत ही समाधान: मंत्री योगेंद्र उपाध्याय

लखनऊ : 13 मई 2026

उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रहित में ईंधन बचत एवं स्वदेशी अपनाने के आवाहन का स्वागत करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच देश को मजबूती प्रदान करेगी।

मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री एवं अधिकारी भी इस मुहिम को अपनाते हुए ईंधन की खपत कम करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने स्वयं सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन के उपयोग और स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया है।

उन्होंने आगे कहा कि अनावश्यक ईंधन खपत को रोकने के उद्देश्य से आगामी अधिकांश बैठकों और कार्यक्रमों को वर्चुअल माध्यम से संचालित किया जाएगा। केवल अत्यंत आवश्यक कार्यक्रमों में ही भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, कार्यकर्ताओं से भी अपील की गई है कि वे ईंधन की बचत के लिए ई-वाहनों तथा पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिकाधिक उपयोग करें।

उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि वे पहले से ही सरकारी प्रोटोकॉल के अंतर्गत सीमित वाहनों के उपयोग के पक्षधर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के आवाहन के बाद उन्होंने इसे और सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि “वर्क फ्रॉम होम” और वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता देकर न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि समय और संसाधनों का भी बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।

योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में विदेशी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो रही है, ऐसे में स्वदेशी अपनाना न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री की इस पहल को देशहित में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए आमजन से भी इसमें सहभागिता की अपील की।  उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित में ईंधन और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है।

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