हर दो माह में होगी जनजाति परामर्शदात्री परिषद की बैठक, आदिवासी विकास योजनाओं की होगी नियमित मॉनिटरिंग: भजनलाल शर्मा
राजस्थान Aug 02, 2026 at 10:50 PM , 51मुख्यमंत्री बोले— प्रधानमंत्री के 'ज्ञान मॉडल' के आधार पर जनजाति समुदाय के समग्र उत्थान पर फोकस, राजीविका, पोषण, शिक्षा और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
उदयपुर/जयपुर, 2 अगस्त। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'ज्ञान मॉडल' (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) के आधार पर राज्य सरकार अनुसूचित जनजाति समुदाय के आर्थिक सशक्तीकरण, सामाजिक सुरक्षा और समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को जनजाति बहुल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आजीविका, कृषि, कौशल विकास और पर्यटन से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
रविवार को उदयपुर स्थित कृषि महाविद्यालय में आयोजित राजस्थान अनुसूचित जनजाति परामर्शदात्री परिषद (टीएसी) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मुख्य सचिव स्तर पर हर दो माह में परिषद की बैठक आयोजित की जाए, ताकि जनजातीय क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों और योजनाओं की नियमित समीक्षा एवं मॉनिटरिंग हो सके।
मुख्यमंत्री ने पीएम जन-मन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को लंबित कार्य शीघ्र पूरा करने तथा जनजाति परिवारों तक सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने आश्रम छात्रावासों, आवासीय विद्यालयों, खेल गतिविधियों तथा उदयपुर में प्रस्तावित देश की पहली लैक्रोज अकादमी की बजट घोषणाओं को समयबद्ध रूप से धरातल पर उतारने पर जोर दिया।
उन्होंने मां-बाड़ी केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग, जनजातीय क्षेत्रों में विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने, ड्रॉपआउट रोकने तथा उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति, कालीबाई भील मेधावी स्कूटी योजना और मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना का अधिक से अधिक लाभ पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। साथ ही कालीबाई भील महिला संबल शिक्षा सेतु योजना और लाडो प्रोत्साहन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री ने जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, मोबाइल मेडिकल यूनिट, टेलीमेडिसिन, सिकल सेल रोग और एनीमिया नियंत्रण अभियान को गति देने तथा आईसीडीएस के माध्यम से बच्चों को मिलेट्स आधारित पोषण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने राजीविका से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उनके उत्पादों की गुणवत्ता और आय बढ़ाने, प्राकृतिक उपज से आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार करने तथा राजकीय संस्थाओं में राजीविका उत्पादों की खरीद सुनिश्चित करने के लिए विभागीय समिति गठित करने के निर्देश दिए। साथ ही वन-धन विकास केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षण, ईको एवं ट्राइबल पर्यटन को बढ़ावा देने तथा जनजातीय कला-संस्कृति के संरक्षण के लिए रोडमैप तैयार करने को कहा।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने उदयपुर जिले के फलासिया पंचायत समिति के जालमपुर निवासी प्रगतिशील किसान प्रेमचंद कपाया को जैविक, पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती में उल्लेखनीय योगदान के लिए 'किसान ब्रांड एंबेसडर' घोषित किया। उन्हें कोटा स्थित जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में ट्रेनर नियुक्त किया गया है। अब वे प्रदेशभर के किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देंगे।
बैठक में जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा, विधायकगण, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।






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