नर्मदा जल समझौते से पश्चिमी राजस्थान को मिलेगा बड़ा लाभ, चार राज्यों ने मिलकर सुलझाए वर्षों पुराने विवाद
राजस्थान Jul 08, 2026 at 06:20 PM , 28नई दिल्ली में केंद्र और चार राज्यों के बीच बनी सहमति, मानसून के अतिरिक्त जल के बेहतर उपयोग के लिए बनेगी डीपीआर
जयपुर। भारत सरकार की पहल और सहकारी संघवाद की भावना के तहत राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के बीच नर्मदा नदी के जल के बेहतर उपयोग को लेकर वर्षों से लंबित मुद्दों पर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। नई दिल्ली में 7 जुलाई 2026 को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की उपस्थिति में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस ऐतिहासिक समझौते पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में नर्मदा नदी के अतिरिक्त (अधिशेष) जल के प्रभावी उपयोग और लंबित मामलों के समाधान पर सहमति बनी, जिससे जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस समझौते को राज्यों के बीच आपसी सहयोग और समन्वय का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
राजस्थान सरकार ने बताया कि हाल के दिनों में पार्वती-कालीसिंध-चंबल (एमपीकेसी) परियोजना तथा हथिनीकुंड बैराज से शेखावाटी क्षेत्र तक जल पहुंचाने के लिए भी महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इन परियोजनाओं से राज्य के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल, सिंचाई तथा सामाजिक-आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
प्रेस नोट के अनुसार, नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के वर्ष 1979 के अवार्ड में राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के बीच जल आवंटन निर्धारित किया गया था। अवार्ड के प्रावधानों के तहत मानसून के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त जल का उपयोग संबंधित राज्य अपने क्षेत्र में कर सकता है और यह जल उसके निर्धारित हिस्से में नहीं जोड़ा जाएगा।
राजस्थान सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा के अनुरूप मानसून के दौरान प्राप्त अतिरिक्त जल के भंडारण के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस परियोजना के क्रियान्वयन से पश्चिमी राजस्थान के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों को दीर्घकालिक पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि इस समझौते से न केवल जल संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा, बल्कि प्रदेश के अभावग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता, कृषि विकास और सामाजिक-आर्थिक उन्नति को भी नई गति मिलेगी।






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