*कुसुम योजना का लाभ उठाकर किसान अतिरिक्त आय अर्जित करने के साथ ऊर्जा उत्पादक बनकर दे सकते है पर्यावरण संरक्षण में योगदान*
राजस्थान Mar 10, 2026 at 11:05 AM , 81*पीएम-कुसुम योजना- घटक ए, बी, सी, जानिए- योजना के उद्देश्य, लाभ एवं लाभ उठाने की प्रकिया*
अलवर । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता के परिणाम स्वरुप केंद्र सरकार के द्वारा देशभर में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम-कुसुम योजना) का उद्देश्य किसानों को ऊर्जा और जल सुरक्षा प्रदान करना, उनकी आय बढ़ाना, कृषि क्षेत्र को डीजल मुक्त करना और पर्यावरण प्रदूषण को कम करना है। पीएम-कुसुम योजना का संचालन नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 से किया जा रहा है। राज्य में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में कुसुम योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि क्षेत्रा को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है।
*पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को लाभान्वित करने वाले कम्पोनेंट*
*घटक- ए*
कंपोनेंट-ए के तहत किसान अपनी ज़मीन पर 0.5 मेगावाट से 2 मेगावाट की क्षमता तक के विकेंद्रीकृत ग्राउंड/स्टिल्ट माउंटेड ग्रिड कनेक्टेड सोलर या अन्य नवीकरणीय ऊर्जा आधारित पावर प्लांट लगा सकते हैं। नवीकरणीय ऊर्जा पावर प्लांट (आरईपीपी) किसान अपनी ज़मीन पर सीधे खुद या किसानों के समूह/सहकारी समितियों/पंचायतों/किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ)/जल उपयोगकर्ता संघों (डब्ल्यूयूए) के साथ साझेदारी में या डेवलपर के माध्यम से लगा सकते हैं। इन पावर-प्लांट से उत्पन्न नवीकरणीय बिजली को डिस्कॉम द्वारा पहले से तय स्तरीकृत टैरिफ पर खरीदा जाता है। यदि किसान डेवलपर को अपनी ज़मीन पट्टे पर देते हैं तो वे लीज़ रेंट के लिए भी पात्र हैं। डिस्कॉम वाणिज्यिक संचालन तिथि से पांच वर्ष की अवधि के लिए खरीदी गई प्रति यूनिट 0.40 रुपये या स्थापित क्षमता के प्रति मेगावाट 6.6 लाख रुपये, जो भी कम हो, की दर से प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (पीबीआई) प्राप्त करने के लिए पात्र हैं। डिस्कॉम, यदि चाहें तो, इस घटक के तहत केंद्र सरकार द्वारा उन्हें दिए गए पीबीआई को आरईपीपी मालिक को दे सकते हैं ताकि आरई बिजली का अधिक प्रतिस्पर्धी टैरिफ प्राप्त किया जा सके।
कुसुम कम्पोनेंट-ए के तहत अलवर वृत मे कुल 98 पीपीए हुये हैं, जिनके सापेक्ष मे अब तक 6 सौर ऊर्जा संयंत्र नामित टहला, रेनी, चिरखाना, इन्दरगढ़, चिकानी एवं ऊंटवाल चालू हो चुके हैं और शेष सन्यंत्रों का कार्य प्रगति पर है।
*घटक - बी*
कंपोनेंट-बी के अंतर्गत किसान सिंचाई के लिए स्टैंड-अलोन सोलर एग्रीकल्चर पंप लगा सकते हैं। इसके तहत सिंचाई हेतु 7.5 एचपी क्षमता के अधिकतम 100 मीटर गहराई तक के सौर ऊर्जा पंप संयंत्र 60 प्रतिशत अनुदान पर देय है। इसके लिए कृषक के पास स्वयं के भू- स्वामित्व में 0.4 हेक्टेयर भूमि होना आवश्यक है। अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति कृषक हेतु तीन व पांच एचपी क्षमता के सौर ऊर्जा पंप संयंत्रा स्थापना हेतु 0.2 हेक्टेयर भूमि आवश्यक है, वहीं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को राज्य योजना से राशि 45 हजार रुपए प्रति संयंत्र अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान किया गया है, इसमें वे किसान पात्रा हैं जिनके पास कृषि भूमि में सिंचाई स्रोत हो तथा सिंचाई करने के लिए कृषि विद्युत कनेक्शन नहीं हो अथवा सिंचाई के लिए डीजल चालित संयंत्र या अन्य साधन पर निर्भर हो।
*घटक - सी*
कंपोनेंट-सी के तहत कृषक अपने व्यक्तिगत पंप सोलराइजेशन (आईपीएस) मोड के तहत ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों के सोलराइजेशन और कृषि भार के फीडर लेवल सोलराइजेशन (एफएलएस) को भी सक्षम बनाता है। इसके तहत ग्रिड से जुड़े 7.5 एचपी के कृषि पंप सेटों पर सोलर पैनल दुगुनी क्षमता तक लगाकर इससे बनने वाली बिजली का उपयोग न केवल अपनी खेती के लिए बल्कि अतिरिक्त बिजली उत्पादन को बिजली कंपनी को बेचकर किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। सरकार घटक-सी के तहत आईपीएस और एफएलएस दोनों के लिए 30 प्रतिशत (या पूर्वाेत्तर क्षेत्र/पहाड़ी क्षेत्र/द्वीपों के लिए 50 प्रतिशत) की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) प्रदान करती है। यह किसानों को दिन के समय सुनिश्चित सौर ऊर्जा प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
कुसुम कम्पोनेंट-सी के तहत अलवर वृत में कुल 23 पीपीए हुये हैं, जिनके सापेक्ष में अब तक 3 सौर ऊर्जा संयंत्रा नामित बालेटा, चिकानी एवं नंगला सेडू चालू हो चुके हैं और शेष सन्यंत्रों का कार्य प्रगति पर है।
*योजना की अधिक जानकारी के लिए यहां करें संपर्क*
योजना की अधिक जानकारी के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की आधिकारिक वेबसाइट www.mnre.gov.in पर विजिट करें अथवा टोल फ्री नंबर 1800-180-3333 डायल करें।
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