राजस्थान में खनन क्षेत्र में डिजिटल क्रांति: 125 तुलाई कांटों का ऑटोमाइजेशन, 3,000 से अधिक वाहन व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम से जुड़े

राजस्थान , 59

जयपुर, 28 फरवरी।
राज्य सरकार ने खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और राजस्व संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पहले चरण में बड़े स्टेक होल्डर्स से जुड़े 125 तुलाई कांटों (वेटब्रिज) का ऑटोमाइजेशन पूरा कर लिया है। इसके साथ ही 3,000 से अधिक खनिज परिवहन वाहनों को व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) से जोड़ा जा चुका है।
खान एवं भूविज्ञान विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकान्त ने शनिवार को रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) प्रणाली के हाईब्रिड मोड पर विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में मार्च के अंत तक एक हजार से अधिक तुलाई यंत्रों को ऑनलाइन ऑटोमाइजेशन प्रणाली से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पहले चरण की उपलब्धियां
प्रमुख सचिव श्री रविकान्त ने बताया कि पहले चरण में हिन्दुस्तान जिंक, कॉपर, लिग्नाइट और सीमेंट जैसे बड़े स्टेक होल्डर्स से जुड़े लगभग 120 तुलाई कांटों के ऑटोमाइजेशन का लक्ष्य रखा गया था, जिसके विरुद्ध 125 तुलाई कांटों पर हार्डवेयर इंस्टॉलेशन और ऑटोमाइजेशन का कार्य पूर्ण किया गया है। इनमें से 105 से अधिक तुलाई कांटों का सफल परीक्षण हो चुका है, जबकि शेष का परीक्षण एक-दो दिनों में पूर्ण कर लिया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि अब तक 3,073 वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम इंस्टॉल किया जा चुका है। मॉड्यूल्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 59 जीपीएस वेंडर्स/ओईएम का पंजीकरण किया गया है।
पीएम उन्नति प्रोजेक्ट से जुड़ा है प्रोजेक्ट
श्री रविकान्त ने बताया कि यह परियोजना पीएम उन्नति प्रोजेक्ट से जुड़ी होने के साथ ही राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इससे खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, अवैध खनन एवं राजस्व छीजत पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा और खनन पट्टाधारकों को भी सुव्यवस्थित व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
विभागीय निगरानी जारी
निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा ने बताया कि परियोजना की विभागीय स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। अतिरिक्त निदेशक (मुख्यालय) महेश माथुर ने कहा कि पहले चरण में बड़े स्टेक होल्डर्स को आरएफआईडी के दायरे में लाने पर फोकस किया गया, जबकि दूसरे चरण में एक हजार से अधिक तुलाई यंत्रों को शामिल किया जाएगा।
बैठक में संयुक्त सचिव अरविन्द सारस्वत, ओएसडी श्रीकृष्ण शर्मा, एसएमई प्रताप मीणा, अधीक्षण भूवैज्ञानिक संजय सक्सैना, अतिरिक्त निदेशक आईटी शीतल अग्रवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
खनन क्षेत्र में तकनीकी हस्तक्षेप का यह कदम राज्य में ई-गवर्नेंस को मजबूती देने और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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