पीएम जनमन अभियान से बारां जिले के सहरिया समुदाय की बदलेगी तस्वीर, 1.30 लाख से अधिक लोगों को मिल रहीं बुनियादी सुविधाएं

राजस्थान , 16

*आवास, बिजली, पेयजल, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर; जनजातीय परिवारों के सर्वांगीण विकास की दिशा में डबल इंजन सरकार के प्रयास*
 
**बारां।** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सपने को साकार करने की दिशा में जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) की शुरुआत की। 5 नवंबर 2023 को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में योजना के क्रियान्वयन और निगरानी के माध्यम से जनजातीय समुदायों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
 
पीएम जनमन के तहत सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सड़क और दूरसंचार संपर्क, बिजली तथा स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। बारां जिले में इस अभियान के माध्यम से सहरिया समुदाय के हजारों परिवारों को लाभ मिल रहा है।
 
### 324 गांवों में 1.30 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा अभियान
 
बारां जिले की 149 ग्राम पंचायतों के 324 गांवों में पीएम जनमन के तहत सहरिया समुदाय के 33,743 परिवारों के 1,30,068 लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। आवास, पेयजल, बिजली, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को अभियान की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
 
### 14,671 आवासों का निर्माण पूरा
 
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत जिले में 23,384 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 14,671 आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अलावा 21,720 लाभार्थियों को पहली, 18,523 को दूसरी और 15,056 लाभार्थियों को तीसरी किस्त जारी की जा चुकी है।
 
पेयजल सुविधा के तहत 29 बस्तियों के चार हजार से अधिक परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया जा रहा है। शेष परिवारों को अमृत-2 और परवन-अकावद वृहद पेयजल परियोजना के माध्यम से लाभान्वित करने की योजना है।
 
विद्युतीकरण के तहत 16,023 परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। वहीं, सड़क संपर्क मजबूत करने के लिए 22 संपर्क सड़कों का निर्माण कार्य पूरा किया गया है।
 
### शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा
 
पीएम जनमन के तहत जनजातीय बच्चों और युवाओं की शिक्षा तथा कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले में 15 बहुउद्देश्यीय केंद्र, 51 आंगनबाड़ी केंद्र और 51 वन धन विकास केंद्र संचालित हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में से 22 के भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है।
 
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के कार्यक्रम के तहत राजस्थान में 8,659 लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। ये लोग 51 वन धन विकास केंद्रों के संचालन से जुड़े हैं। राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम (आरएसएलडीसी) के माध्यम से भी 621 युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है।
 
ट्राइफेड के सहयोग से वन धन विकास केंद्रों के जरिए वन उपज के विपणन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि जनजातीय परिवारों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
 
### छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों से शिक्षा को संबल
 
बारां जिले में जनजातीय विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए विभिन्न प्रकार के छात्रावास और आवासीय शिक्षण संस्थान संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 33 सहरिया आश्रम छात्रावास, तीन जनजातीय बालिका आश्रम छात्रावास, दो सहरिया बालिका महाविद्यालय छात्रावास, सात आवासीय विद्यालय और एक एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा सहरिया बहुल क्षेत्रों में 297 डे-केयर केंद्र और भील बहुल क्षेत्रों में 15 मां-बाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
 
राज्य सरकार के जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की ओर से संचालित 33 सहरिया आश्रम छात्रावासों में बालकों के लिए 23 और बालिकाओं के लिए 10 छात्रावास हैं। इनमें कक्षा छह से 12वीं तक के विद्यार्थियों को प्रतिमाह प्रति विद्यार्थी 3,250 रुपये के व्यय से निःशुल्क आवास, भोजन, यूनिफॉर्म और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
 
तीन जनजातीय बालिका आश्रम छात्रावासों में भी कक्षा छह से 12वीं तक की छात्राओं को आवास, भोजन, यूनिफॉर्म और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। विद्यार्थियों को अंग्रेजी, गणित और विज्ञान विषयों की कोचिंग भी उपलब्ध कराई जा रही है।
 
जिले में दो सहरिया बालिका महाविद्यालय छात्रावास भी संचालित हैं। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से संचालित राजस्थान स्टेट एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल में 480 विद्यार्थियों की क्षमता है। यहां विद्यार्थियों को शिक्षा, आवास, अल्पाहार, भोजन, यूनिफॉर्म और खेलकूद सहित विभिन्न सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।
 
छात्रावास संबंधी निर्माण कार्यों के तहत दो छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 19 अन्य छात्रावासों का निर्माण जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
 
### मोबाइल चिकित्सा इकाइयों से गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं
 
दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए आठ मोबाइल चिकित्सा इकाइयां संचालित की जा रही हैं। इनके माध्यम से अब तक 2 लाख 45 हजार से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल चुका है। इन इकाइयों से जरूरतमंद लोगों तक चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
 
### महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल
 
राज्य सरकार के जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की ओर से सहरिया और खैरवा समुदाय में कुपोषण की रोकथाम के लिए पहले प्रति व्यक्ति प्रतिमाह 250 मिलीलीटर घी, 500 ग्राम दाल और 500 मिलीलीटर सोया तेल निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता था। अब अधिक पारदर्शिता और महिलाओं को आर्थिक निर्णय लेने में अधिक स्वतंत्रता देने के उद्देश्य से परिवार की महिला मुखिया को प्रतिमाह 1,200 रुपये सीधे लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से दिए जा रहे हैं।
 
इस व्यवस्था से महिला मुखिया को परिवार की जरूरतों के अनुसार खर्च करने और घरेलू आर्थिक निर्णयों में अधिक भागीदारी का अवसर मिल रहा है।
 
### मां-बाड़ी केंद्रों से बच्चों को शिक्षा और पोषण
 
जनजातीय क्षेत्रों में ऐसे स्थानों को चिह्नित किया गया, जहां विद्यालय या आंगनबाड़ी केंद्र दूर होने के कारण बच्चों को पहुंचने में परेशानी होती थी। ऐसे क्षेत्रों में 297 सहरिया बहुल स्थानों और 15 भील बहुल स्थानों पर मां-बाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
 
इन केंद्रों पर बच्चों को अध्ययन सामग्री, स्कूल ड्रेस, नाश्ता और दिन में दो बार भोजन निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा से जोड़ना, उनकी नियमित उपस्थिति बढ़ाना और पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना है।
 
### अंत्योदय की भावना को धरातल पर उतारने का प्रयास
 
पीएम जनमन अभियान के माध्यम से बारां जिले के विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुदायों तक आवास, पेयजल, बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका संबंधी सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के समन्वय से जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने तथा उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

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