*प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 3 अक्टूबर 2026 को 12 वर्ष पूरे होने पर विशेष*
राजस्थान Oct 02, 2026 at 02:30 PM , 27विशेष लेख
*प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ बना आम जन की असाधारण कहानियों का राष्ट्रीय मंच*
*वासुदेव देवनानी*
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में करोड़ों लोगों तक एक साथ पहुंचना अपने आप में बड़ी चुनौती है। क्योंकि भाषाएं अलग हैं, भौगोलिक परिस्थितियां अलग हैं, जीवनशैली अलग है और समस्याएं भी अलग-अलग हैं। ऐसे देश में संवाद का कोई ऐसा माध्यम, जो महानगर से लेकर गांव तक और युवा से लेकर बुजुर्ग तक सहजता से पहुंच सके, उसकी अपनी विशेष महत्ता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ इस दृष्टि से भारतीय जनजीवन में एक विशिष्ट स्थान बना चुका है।
जब प्रधानमंत्री मोदी देशवासियों से ‘मन की बात’ करते हैं तो वे देश को कई नई नवाचारों और सफलता की कहानियों की जानकारी देते है । कार्यक्रम की विशेष पहचान उन सामान्य भारतीयों की कहानियों से बनी है, जो अपने छोटे-से प्रयास से समाज में बड़ा परिवर्तन लाने का काम कर रहे हैं। किसी गांव का जल संरक्षण अभियान, किसी महिला समूह की आत्मनिर्भरता, किसी युवा का नवाचार, किसी कलाकार की साधना या किसी शिक्षक का शिक्षा के प्रति समर्पण—‘मन की बात’ ने ऐसी अनेक प्रेरक पहल को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
इस कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके केंद्र में ‘आम आदमी की असाधारण क्षमता’ सुनाई देती है। देश के किसी दूरदराज इलाके में रहने वाला व्यक्ति जब यह सुनता है कि उसके जैसे किसी सामान्य नागरिक के प्रयास का उल्लेख प्रधानमंत्री जी ने स्वयं राष्ट्रीय मंच से किया है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास पैदा होता है। उसे लगता है कि परिवर्तन के लिए बड़े पद, बड़े संसाधन या महानगर की सुविधाएं ही आवश्यक नहीं हैं; इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास भी बदलाव की ताकत बन सकते हैं।
‘मन की बात’ ने स्थानीय से राष्ट्रीय स्तर की विकास यात्रा को नया आयाम दिया है। भारत की शक्ति केवल उसके बड़े शहरों और महान संस्थानों में नहीं, बल्कि उसके गांवों, कस्बों, लोक कलाओं, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय प्रतिभाओं में है। कार्यक्रम के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों की ऐसी अनेक गतिविधियां सामने आई हैं, जिनके बारे में देश के दूसरे हिस्सों के लोगों को शायद पहले इनकी जानकारी ही नहीं थी।
भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़े विषयों को ‘मन की बात’ में मिलने वाला स्थान भी उल्लेखनीय है। विशेष रूप से लोक गीत, लोक नृत्य, हस्तशिल्प, पारंपरिक कलाएं, भारतीय भाषाएं, स्थानीय उत्सव और सांस्कृतिक विरासत जैसे विषय केवल अतीत की स्मृतियां नहीं, बल्कि भारत की जीवंत पहचान हैं। जब इन पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होती है तो नई पीढ़ी का अपनी जड़ों से जुड़ाव मजबूत होता है।
राजस्थान जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध प्रदेश के संदर्भ में इसकी विशेष प्रासंगिकता है। राजस्थान की लोक संगीत परंपरा, कठपुतली, हस्तशिल्प, लोक नृत्य, जल संरक्षण की पारंपरिक प्रणालियां और ग्रामीण जीवन से जुड़े अनेक उदाहरण भारतीय संस्कृति की विविधता को प्रस्तुत करते हैं। ‘मन की बात’ जैसे मंच ने प्रधानमंत्री के माध्यम से इन स्थानीय विरासतों ,नवाचारों और सफलता की कहानियों का प्रधानमन्त्री जी की वाणी से आकाशवाणी पर प्रसारित होना इन्हें व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ से जोड़ता हैं।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण संदेश ‘स्थानीय उत्पादको के प्रति सम्मान’ और उनका उत्साह वर्धन करना है। स्थानीय उत्पादों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों की चर्चा ने इस विचार को बल दिया है कि किसी वस्तु की पहचान केवल उसके बड़े ब्रांड या बाजार से नहीं, बल्कि उसके पीछे जुड़े श्रम, परंपरा और स्थानीय प्रतिभा से भी होती है। भारत के छोटे शहरों और गांवों में काम कर रहे कारीगरों के लिए ऐसी चर्चा उनका आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है।
‘मन की बात’ की यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हुआ है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने, बेटी के सम्मान, फिटनेस, अंगदान, रक्तदान, प्राकृतिक खेती, जैव विविधता और सामाजिक सेवा जैसे विषयों पर नागरिकों की भागीदारी को सामने लाने से यह संदेश जा रहा है कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर इसमें भागीदार है।
यही कारण है कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की ‘मन की बात’ को केवल जानकारियाँ देने का कार्यक्रम मानना उसके स्वरूप को सीमित करना है। मन की बात विविधताओं को समेटे ऐसा मंच है जहां सरकार और समाज के बीच संवाद का एक मानवीय पुल बना है। प्रधानमंत्री मोदी जी जब किसी छोटे गांव में काम कर रहे व्यक्ति की उपलब्धि का उल्लेख करते हैं तो राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र अचानक दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों से हटकर देश के किसी छोटे से गांव तक पहुंच जाता है।
इस कार्यक्रम ने रेडियो माध्यम को भी डिजिटल युग में एक नया जीवन दिया है। आज सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन के दौर में भी रेडियो के माध्यम से सीधे संवाद की परंपरा कायम रहना अपने आप में महत्वपूर्ण है। ‘मन की बात’ रेडियो प्रसारण के साथ विभिन्न डिजिटल माध्यमों पर भी उपलब्ध रहती है, जिससे इसकी पहुंच पारंपरिक रेडियो श्रोताओं से बहुत आगे बढ़ी है।
कार्यक्रम की एक विशेषता इसकी सरल और आत्मीय भाषा है। प्रधानमंत्री मोदी जी सामान्य जीवन के उदाहरणों के माध्यम से विषयों को सामने रखते है। उनकी यह शैली इसे औपचारिक सरकारी संदेश से अलग करती है। श्रोताओं को ऐसा अनुभव होता है जैसे वह किसी सार्वजनिक मंच पर भाषण नहीं, बल्कि देश के किसी बड़े परिवार के सदस्य से संवाद सुन रहा हो।
‘मन की बात’ ने यह भी दिखाया है कि भारत में प्रेरक कहानियों की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने और सामने लाने की है। देश के अलग-अलग हिस्सों में चुपचाप काम कर रहे हजारों लोग अपने क्षेत्र में परिवर्तन के वाहक हैं। कोई पेड़ बचा रहा है, कोई नदी को पुनर्जीवित कर रहा है, कोई बेटियों की शिक्षा के लिए अभियान चला रहा है, कोई दिव्यांगों के लिए काम कर रहा है और कोई विलुप्त होती कला को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा है। प्रधानमन्त्री मोदी ऐसी कहानियों को सुना इन लोगों का उत्साहवर्धन तथा अन्य लोगों के लिए इसे प्रेरणा का स्रोत बना रहें हैं ।
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी मानते है कि इन प्रेरक कहानियों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वे समाज में ‘मैं क्या कर सकता हूं?’ का प्रश्न पैदा करती हैं। किसी उपलब्धि को केवल देखने या सुनने के बजाय उससे प्रेरणा लेकर अपने आसपास कुछ करने की भावना ही जनभागीदारी की वास्तविक शक्ति है।
वास्तव में ‘मन की बात’ की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसने ‘देश’ को केवल एक भौगोलिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की साझा कहानियों के रूप में देखने का अवसर दिया है। यहां भारत केवल संसद ,विधान सभाओं,राजधानी और बड़े शहरों में नहीं दिखाई देता, वह किसी किसान के खेत में, किसी कारीगर की कार्यशाला में, किसी छात्र के प्रयोग में, किसी महिला के स्वयं सहायता समूह में और किसी कलाकार की साधना में दिखाई देता है। रेडियो की आवाज जब सुदूर गाँवों की चौपालों , कस्बों की दुकानों, खेत खलियानों और कार्यस्थलों तक पहुंचती है तो संवाद की यह सरल परंपरा आधुनिक भारत की एक महत्वपूर्ण कहानी कहती है।देश बदलने की शक्ति केवल बड़े फैसलों में नहीं, छोटे-छोटे नागरिक प्रयासों में भी होती है। इसीलिए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की ‘मन की बात’ का वास्तविक प्रभाव उसके प्रसारण की अवधि से कहीं बड़ा है। यह लोगों को सुनने,पहचानने, प्रोत्साहित करने और अपने स्तर पर कुछ करने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह रेडियो कार्यक्रम इसी कारण एक नियमित प्रसारण से आगे बढ़कर जनभागीदारी, सकारात्मक सोच और भारत की विविध प्रतिभाओं को पहचान देने वाला जनसंवाद बन गया है।
‘मन की बात’ का सार एक वाक्य में कहा जाए तो वह यही है प्रधानमन्त्री मोदी जी का यह कार्यक्रम देश के करोड़ों लोगों की छोटी-बड़ी प्रेरक कहानियां एक साझा मंच पर लाने का एक बड़ा माध्यम बन कर उभरा हैं, जोकि भारत की सामूहिक शक्ति का एक नया स्वरूप प्रदर्शित करता है।
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