36 घण्टे तक निर्जला रहने वाली तपस्विनीयों ने व्रत तोड़ा

परिवेश , 912

हो गया छठ शाम को डूबते सूर्य को देखने और अर्घ दे कर विदा करने वाली व्रतियों को भरोसा था कि सूर्य पुनः उदय होंगे गङ्गा के जल में स्वर्ण रश्मियां उतरेंगी सूर्य के प्रकाश में धरा मुस्कुराएगी मनुष्य का भरोसा इस सृष्टि की सबसे बड़ी शक्ति है सूर्य क्यों न उतरें सुनहरी किरणों की मुस्कान कैसे न फैले 36 घण्टे तक निर्जला रहने वाली तपस्विनीयों ने व्रत तोड़ा तो सूर्य को उगते देख कर तोड़ा... जबतक सूर्य उदय नहीं हुए तबतक उनकी प्रार्थनाओं के गीत नहीं थमे अर्थ समझ रहे हैं समझिये यही भरोसा आपकी शक्ति है... यही विश्वास सनातन की शक्ति है...
     सौभाग्य का सूर्य यदि अस्त हो जाय तो अपनी तपस्या और परिश्रम के बल पर पुनः सूर्योदय करा लेने का साहस देता पर्व है छठ और गङ्गा के घाट से निकल कर सुदूर अरब के विधर्मी परिवेश में भी अरब सागर के जल में खड़ी हो कर सूर्य को अर्घ देती हमारी कुलवधुएँ इसे सिद्ध कर के दिखाती हैं।
 धर्म तर्क नहीं आस्था के बल पर दीर्घायु होता है धर्म की शक्ति धारकों के विश्वास में होती है और वह उसी के बल पर विजयी होता है माथे पर भगवा बांध कर स्वयं की आहुति देने निकलते योद्धाओं के हृदय में कभी न समाप्त हो सकने का यही विश्वास होता था जिसके कारण वे हार कर भी कभी नहीं हारे... यह भरोसा बना रहना चाहिए यह भरोसा बना रहा तो संसार की समस्त शक्तियां मिल कर भी आपका नुकसान नहीं कर पाएंगी छठी मइया सबके जीवन में प्रकाश फैलाएं धर्म की जय हो...

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