अदभुत गाँव:जहाँ लोग नही पहनते जूते चप्पल

परिवेश , 616

भारत बेहद खबूसूरत और अजीबों-गरीब परंपराओं से भरा देश है. यहां कई गांव हैं, जो अपने आप में अद्भुत और  अनोखे हैं. आज हम आपको कलिमायन नाम के एक ऐसे अनोखे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां के लोग चप्पल-जूते नहीं पहनते. जी हां, सुनकर हैरत जरूर हो रही होगी, लेकिन गांव की इस परंपरा के पीछे की वजह बड़ी दिलचस्प है.कलिमायण गांव तमिलनाडु के एक जंगल में बसा छोटा सा गांव है. इस गांव में लगभग 100 परिवार रहते हैं. रोचक बात तो देखिए कि इस गांव में कोई सड़क नहीं है, इसलिए यहां पहुचंने के लिए एक कठिन ट्रेक की जरूरत होती है. आप यह देखकर चौंक जाएंगे कि यहां घरों से ज्यादा मंदिर बसे हुए हैं. तो आइए जानते हैं इस खूबसूरत गांव और यहां के रहने वाले लोगों की इस अजीब परपरा के बारे में.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, देवता के सम्मान में गांव के लोग ऐसा करते हैं. हैरत की बात ये है कि, यहां ये नियम जबरदस्ती नहीं मनवाना पड़ता. लोग खुशी-खुशी इसका पालन करते हैं. हालांकि गांव के बाहर जाने के लिए लोग हाथों में जूते-चप्पल लेकर जाते हैं और गांव की सीमा के बाहर पहुंचते ही पहन लेते हैं. गांव में प्रवेश करने से पहले ही चप्पल-जूतों को हाथ में ले लेते हैं.,अगर इस गांव में कोई गलती से भी जूते या चप्पल पहन लेता है तो उसे कठोर सजा दी जाती है.

बताया जाता है कि इस गांव के लोग अपाच्छी नामक देवता की सदियों से पूजा कर रहे हैं. वह मानते हैं कि अपाच्छी देवता ही उनकी रक्षा करते हैं. अपने देवता के प्रति आस्था की वजह से गांव की सीमा के अंदर जूते-चप्पल पहनने पर बैन है.
आपको जानकर हैरानी हुई होगी, लेकिन इस गांव में रहने वाले लोग सदियों से इस अजीबो गरीब परंपरा को निभा रहे हैं. अगर किसी को बाहर जाना होता है तो वह हाथ में जूते चप्पल लेकर जाता है और गांव की सीमा खत्म होने के बाद उसे पहनता है. इसके बाद जब वे लौटकर आते हैं, तो गांव की सीमा से पहले ही जूता चप्पल उतार देते हैं.

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