अदभुत मंदिर : मौत का मंदिर
परिवेश Apr 26, 2022 at 08:33 PM , 694लोग मंदिर जाते है अपनी श्रद्धा भाव से ईश्वर के दर्शन करने. ईश्वर की पूजा अर्चना करने . अपनी मंगलकामना के लिए ईश्वर से प्रार्थना करने लेकिन क्या कोई ऐसा भी मंदिर भी है जहाँ जाते ही मौत हो जाय. आपको आश्चर्य होगा लेकिन एक ऐसा भी मंदिर है जहाँ जाते ही लोगों की मृत्यु हो जाती है . है ना आश्चर्य जनक बात ! दुनियाभर में कई रहस्यमय जगह मौजूद हैं जिन्हें लेकर तरह-तरह के दावे किए जाते हैं. ऐसी ही एक जगह तुर्की के शहर हिरापोलिस में है. यहां एक मंदिर है जिसे लोग नरक का दरवाज़ा कहते हैं. तुर्केमिस्तान की राजधानी अश्गाबात से लगभग 160 मील उत्तर में स्थित यह रेगिस्तानी गड्ढा दशकों से जल रहा है. तुर्कमेनिस्तान आने वाले पर्यटकों के लिए यह एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा है.
लोगों का कहना है कि जो भी इस मंदिर के पास जाता है उसकी मृत्यु हो जाती है. इतना ही नहीं, कहा जाता है कि एक बार अगरकोई इस मंदिर में प्रवेश कर जाए तो उसका शरीर नहीं मिलता है.
एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले कई सालों से इस रहस्यमयी मंदिर में मौतें हो रही हैं. हैरानी करने वाली बात तो यह है कि इस मंदिर में इंसानों के साथ-साथ जानवरों की भी मौत हो जाती है. यही कारण है कि लोग इसे द गेट ऑफ हेल यानि नर्क का दरवाज़ा कहकर बुलाते हैं.
स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर में ग्रीक देवता सांस लेते है, जिनकी सांस अत्यंत जहरीली होती है. जिसके चलते जानवरों की मौत हो जाती है. कहा जाता है कि ग्रीको-रोमन काल के दौरान, मंदिर में आने वाले किसी भी व्यक्ति का सिर कलम कर दिया जाता था. दूसरी तरफ वैज्ञानिकों की मानें तो मंदिर के नीचे से लगातार जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है.1971 के गैस-ड्रिलिंग की असफलता के चलते इस गड्ढे का जन्म हुआ। इसका व्यास करीब 60 मीटर और गहराई करीब 20 मीटर है. गैस को फैलने से रोकने के लिए भूवैज्ञानिकों ने आग लगा दी थी. वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि कुछ हफ्तों में गैस जल जलकर खत्म हो जाएगी. लेकिन यह आग बुझी नही. यही कारण है कि मनुष्य, पशु और पक्षी इसके संपर्क में आते ही मर जाते हैं. वैज्ञानिकों को मंदिर के नीचे की गुफा में बड़ी मात्रा में कार्बन डाई आक्साइड गैसमिली है. जिसके चलते आधे घंटे में निकलने वाली 10 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड किसी भी व्यक्ति की जान ले सकती है. वहीं मंदिर की गुफा के अंदर जहरीली गैस की मात्रा 91 प्रतिशत है. इसलिए यहां आने वाले जानवर और इंसान अपनी जान गवा बैठते हैं
तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति देश के सबसे प्रमुख स्थलों में से जाने जाने वाले इस नरक के द्वार को बंद करने जा रहे हैं. इसका मतलब है कि धधकते प्राकृतिक गैस क्रेटर का अस्तित्व अब समाप्त हो जाएगा .































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