अदभुत फूल : दुनिया का सबसे बड़ा फूल

हेडलाइंस , 1197

विश्व के इस सबसे बड़े और भारी फूल का नाम रेफलिसिया है. इसका व्यास साढ़े तीन फुट और वजन बारह किलो होता है. इस पौधे की जो सबसे छोटी प्रजाति पाई जाती है उस फूल का व्यास 20 सेंटीमीटर तक का होता है. रेफलिसिया एक पौधा परजीवी है जो अपना भोजन दूसरे पौधों से प्राप्त. करता है. इसका तना सफेद रंग का होता है, जो भूमि की ऊपरी सतह पर कुछ दूर जाकर फूल का रूप धारण करता है. इस फूल में पत्तियां नहीं होती.
यह फूल अक्तूबर में खिलना शुरू होता है और मार्च तक इसमें फूल आते हैं यह फूल केसिरया आसमानी और सफेद रंग का होता है. नर और मादा फूलों की संरचना लगभग एक जैसी ही होती है. पूरा फूल दल चक्रों के पांच खंडों में होता है. दल चक्र के बीच में प्यालीनुमा पुष्पनाल होती है जो आधार पर अंडाशय से जुड़ी होती है. नर फूल में पुष्पमाल एक ठोस रचना होती है जिसके ऊपरी सिरे पर एक चौड़ी कोर प्लेट होती है. प्लेट के किनारे पर परागकोष होते हैं.
इस प्रजाति के जितने भी फूल होते हैं अगर आप उन्हें छूएंगे तो ऐसा लगता है जैसे आप किसी मांस के टुकड़े को छू रहे हो. इस फूल से किसी भी प्रकार की सुगंध नहीं आती जबकि सड़े हुए मांस की तरह बदबू आती है जिसके कारण कुछ विशेष प्रकार के जीव और कीड़े इसकी ओर आकर्षित होते हैं. यह फूल  मलेशिया और इंडोनेशिया में भी पाए जाते हैं इसे सबसे पहले इंडोनेशिया के वर्षा वन में खोजा गया था अब तक इसकी 26 प्रजातियों का पता लगाया जा चुका है.
इस पौधे की शुरुआत किसी संक्रमित पेड़ की जड़ से होती है, जिसमें सबसे पहले एक गांठ सी बनती है जो धीरे-धीरे बड़ी होकर बंद गोभी के जैसी हो जाती है. धीरे से 4  दिनों में इसकी पंखुड़िया भी खुल जाती है इस पौधे में केवल फूल ही जमीन की ऊपरी सतह पर होता है बाकी सब कुछ जमीन के निचली सतह पर .
इस की खोज सबसे पहले इंडोनेशिया के वर्षा वनों में हुई थी, जब सर्वप्रथम डाक्टर जोसेफ अर्नाल्ड के एक स्थानीय गाइड ने इसे देखा. इसका नामकरण उसी खोजी दल के नेता सर थॉमस स्टैमफोर्ड रेफ्लस के नाम पर हुआ. अब तक इसकी 26 प्रजातियां खोजी जा चुकी है. जिनमें से 4 का नामकरण स्पष्ट रूप से नहीं हुआ है. इंडोनेशिया और मलेशिया के अतिरिक्त यह पौधा सुमात्रा और फिलीपींस  में भी पाया जाता है. इसका जन्म किसी संक्रमित पेड़ की जड़ से होता है. पहले एक गाँठ सी बनती है और जब यह बड़ी होकर एक  बंदगोभी  के आकार की हो जाती है तब चार दिनों के अंदर इसकी पंखुड़ियाँ खुल जाती हैं और पूरा फूल आकार ले लेता है. इस पौधे में केवल फूल ही एक ऐसा भाग है जो जमीन के ऊपर रहता है शेष सब भाग कवक जाल की भांति पतले-पतले होते हैं और जमीन के अन्दर ही धागों के रूप में फैले रहते हैं. यह दूसरे पौधे की जड़ों से भोजन चूसते रहते हैं, जो कि पौधे को पोषण देते हैं .

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