अदभुत मंदिर:अदृश्य हो जाने वाला मंदिर
हेडलाइंस Nov 28, 2021 at 11:50 PM , 510भारत में सभी धर्म समुदाय के लोग एकता, सद्भावना के साथ रहते हैं . इन सभी धर्मों के पवित्र पूजन स्थलल भी यहां मौजूद हैं . विशेष तौर पर भारत में हिंदू धर्म से जुड़े कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं, इनमें भी कुछ ऐसे हैं जो कि रहस्योंप से भरे हुए हैं जैसे राजस्थाहन का करणी माता मंदिर या फिर पुष्क र का ब्रह्मा मंदिर . लेकिन एक ऐसा मंदिर भी है जो दिन में एक से दो बार नजरों से ही ओझल हो जाता है, यानि वह आपकी नज़रों से गायब हो जाता है .
ये मंदिर है भगवान शिव का मंदिर, स्तंदभेश्व र महादेव का ये मंदिर कावी, गुजरात में स्थित है .हैरान कर देने वाली बात यह है की यह मंदिर पल भर के लिए ओझल हो जाता है, फिर थोड़ी देर बाद ही उसी जगह पर वापिस भी आ जाता है .
दरअसल यह मंदिर अरब सागर के बिल्कुल सामने है, वडोदरा से 40 मील की दूरी पर स्थित इस मंदिर की खास बात यह है कि आप इस मंदिर की यात्रा तभी कर सकते हैं जब समुद्र में ज्वार कम हो . ज्वार के समय यहां स्थित शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है. यह प्रक्रिया सदियों से चली आ रही है. मंदिर अरब सागर के बीच कैम्बे तट पर स्थित है. इस तीर्थ का उल्लेख ‘श्री महाशिवपुराण’ मे भी मिलता है. इस मंदिर की खोज लगभग 150 साल पहले हुई. मंदिर में स्थित शिवलिंग का आकार 4 फुट ऊंचा और दो फुट के व्यास वाला है. इस प्राचीन मंदिर के पीछे अरब सागर का सुंदर नजारा दिखाई पड़ता है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खासतौर से पर्चे बांटे जाते हैं. जिसमें ज्वार-भाटा आने का समय लिखा होता है. ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना न करना पड़े.पौराणिक मान्यता के अनुसार राक्षस ताड़कासुर ने अपनी तपस्या से शिव को प्रसन्न कर लिया था. जब शिव उसके सामने प्रकट हुए तो उसने वरदान मांगा कि उसे सिर्फ शिव जी का पुत्र ही मार सकेगा और वह भी छह दिन की आयु का. शिव भगवान् ने उसे यह वरदान दे दिया था. वरदान मिलते ही ताड़कासुर ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया. देवताओं और ऋषि-मुनियों को आतंकित कर दिया. देवता महादेव की शरण में पहुंचे. शिव-शक्ति से श्वेत पर्वत के कुंड में उत्पन्न हुए शिव पुत्र कार्तिकेय के 6 मस्तिष्क, चार आंख, बारह हाथ थे. कार्तिकेय ने ही मात्र 6 दिन की आयु में ताड़कासुर का वध किया था.जब शिव पुत्र कार्तिकेय को पता चला कि ताड़कासुर भगवान शंकर का भक्त था, तो वे काफी व्यथित हुए. फिर भगवान विष्णु ने कार्तिकेय से कहा कि वे वधस्थल पर शिवालय बनवा दें. इससे उनका मन शांत होगा.
कार्तिकेय ने ऐसा ही किया. सभी देवताओं ने मिलकर महिसागर संगम तीर्थ पर विश्वनंदक स्तंभ की स्थापना की, जिसे आज स्तंभेश्वर तीर्थ के नाम से जाना जाता है. पौराणिक मान्यता के मुताबिक स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में स्वयं शिवशंभु यानि भगवान शंकर विराजते हैं इसलिए समुद्र देवता स्वयं उनका जलाभिषेक करते हैं. यहां पर महिसागर नदी का सागर से संगम होता है.



























Comments