*वसीम मूर्तद और काफिर है* मौलाना कल्बे जव्वाद!

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 लखनऊ...।

शिया आलिम मौलाना सय्यद कल्बे जव्वाद नक़्वी ने एक खास गुफ्तूगू में बताया कि कोई भी शख्स शरीयत की आड़ लेकर अगर कुफरिया कल्मात बकता है तो वो मूर्तद और इस्लाम से खारिज है।

यह पूछे जाने पर कि शरीयत में तो जान बचाने के लिये झूट भी बोल कर जान बचाने को जायज़ क़रार दिया गया है।

जव्वाद साहब ने जान बचाने के लिये तक़्य्या को सही क़रार देते हूए  कहा कि यह जान बचाने के लिये नहीं अपनी चोरियां छुपाने के लिये मुर्तद हुआ है।

इसको कौन मारने जा रहा था इसको किताब लिखने के लिये किसने कहा किसने दबाव बनाया उन्हों ने कहा यह सिर्फ अपने को बचाने के लिये कुफ्र की हदें पार गया।

उन्हों ने आगे कहा कि फिक़्हे जाफ़रिया के मुताबिक़ वसीम मूर्तद और काफिर है ईरान के कई उलमा ने वाज़ेह किया कि फतवा ज़ाहिरी हालात पर दिया जाता है बातिन पर नहीं,और वसीम ने हज़रत इब्राहीम से लेकर आखरी नबी की शान में इन्तिहाई दर्जे की गुस्ताखी की है और क़ुरान की शान में गुस्ताखी की है जिस से वो मूर्तद और काफिर हुआ है।

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