अयोध्या से मिला है उत्तर प्रदेश सरकार को अपना राज्य चिह्न,नवाबों पर भी रही अयोध्या की कृपा

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अयोध्या। उत्तर प्रदेश के राजकीय चिन्ह की कहानी भी प्राचीन अवध यानी कि फैजाबाद से होकर गुजरती है। इसमें जहां अयोध्या के राजा भगवान राम के आयुध धनुष बाण को शामिल किया गया है,वही मध्यकालीन अवध के नवाबों के शुभ चिन्ह मछली को भी स्थान दिया गया है। इस तरह गंगा जमुनी तहजीब को दर्शाता यह राजकीय चिन्ह पूरी तरह अयोध्या -फैजाबाद की उपज है।अवध के संस्थापक सआदत अली खाँ अवध का सूबेदार नियुक्त होने के बाद जब पहली बार यहाँ की यात्रा में थे, तभी निशान की कहानी शुरू हो गयी थी। सआदत अली खाँ यानी बुरहान उल मुल्क ने जब अपनी सेना के साथ अवध के लिए प्रस्थान किया तो रास्ते में फर्रुखाबाद के पठान नवाब मुहम्मद खांँ बंगश के यहां ठहरे । उन्होंने बुरहान उल मुल्क को न केवल लखनऊ से परिचित कराया बल्कि अपनी राजधानी फैजाबाद को बनाने का मशविरा भी दिया था। उन दिनों लखनऊ में शेखजादों का आतंक फैला हुआ था, जिन को परास्त करने की रणनीति भी नवाब पठान ने ही बताई थी।फर्रुखाबाद से निकलकर जब अवध के पहले नवाब गंगा तट पर आए तो गंगा में बाढ़ आई हुई थी। नदी पार करते हुए नाव पर सवार होकर जब वह बीच धारा में पहुंचे तो एक मछली उछलकर उनकी गोद में आ गिरी। इसे अच्छा शगुन मानते हुए नवाब ने उस मछली को सुरक्षित अपने पास रख लिया। इस मछली का कंकाल अवध के अंतिम शासक वाजिद अली शाह के समय तक खजाने में सुरक्षित रखा हुआ था। तभी से अवध की नवाबी संस्कृति में मछलियों को शाही निशान के तौर पर शामिल किया गया था।उत्तर प्रदेश सरकार का राज्य चिन्ह
अयोध्या की धर्म संस्कृति में आस्था रखने वाले कुछ विचारकों का मत है क्योंकि अयोध्या नगरी मत्स्य आकार में है। इसलिए अयोध्या और अवध से मछली का संबंध ईश्वरीय प्रेरणा को भी दर्शाता है। अवध के नवाब सहादत अली खान को मछली का शुभ चिन्ह ईश्वरीय प्रेरणा से मिला और अवध के नवाबों की सत्ता का संरक्षक बना रहा। इस तरह अयोध्या से मछली और धनुष दोनों का ही संबंध है और दोनों ही ईश्वरीय कृपा का परिचायक हैं।शायद यही वजह है कि स्वतंत्र भारत में उत्तर प्रदेश के गठित होने के बाद उसके राजकीय चिन्ह में भी मछलियों का युग्म शामिल किया गया, जो नवाबी दौर के शाही निशान से प्रेरित था। इस निशान में गंगा जमुनी तहजीब को दर्शाने के लिए रामायण के आदर्श चरित्र मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आयुध को भी शामिल किया गया। इस राजकीय चिन्ह में धनुष की प्रत्यंचा पर चढ़ा हुआ बाण शामिल किया गया है। यह विषम परिस्थितियों में भी संयम और विवेक से शक्ति के संधान का प्रतीक है। इसके साथ मछलियां शुभ मंगल और वैभव का प्रदर्शन करती हैं।

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