अदभुत मंदिर : हवा में लटकता मंदिर

परिवेश , 566

भारत को अगर मंदिरों का देश कहें तो गलत नहीं होगाए क्योंकि यहां इतने मंदिर हैं कि आप गिनते.गिनते थक जाएंगेए लेकिन गिन नहीं पाएंगेण् यहां ऐसे कई मंदिर हैंए जो अपनी भव्यता और अनोखी मान्यताओं के लिए जाने जाते हैंण् ऐसा ही एक अनोखा मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में भी हैण् इस मंदिर की सबसे खास और रहस्यमयी बात ये है कि इसका एक खंभा हवा में लटका हुआ हैए लेकिन इसका रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया हैण्  
इस मंदिर का नाम है लेपाक्षी मंदिरए जिसे श्हैंगिंग पिलर टेंपलश् के नाम से भी जाना जाता हैण् इस मंदिर में कुल 70 खंभे हैंए जिसमें से एक खंभे का जमीन से जुड़ाव नहीं हैण् वो रहस्यमयी तरीके से हवा में लटका हुआ हैण् इसीलिये इसे हैंगिंग टेम्पल भी पुकारते हैं ण्
लेपाक्षी मंदिर के अनोखे खंभे आकाश स्तंभ के नाम से भी जाने जाते हैंण् इसमें एक खंभा जमीन से करीब आधा इंच ऊपर उठआ हुआ हैण्ऐसी मान्यता है कि खंभे के नीचे से कुछ निकालने से घर में सुख.समृद्धि आती हैण् यही वजह है कि यहां आने वाले लोग खंभे के नीचे से कपड़ा निकालते हैंण्
कहा जाता है कि मंदिर का खंभा पहले जमीन से जुड़ा हुआ थाए लेकिन एक ब्रिटिश इंजीनियर ने यह जानने के लिए कि यह मंदिर पिलर पर कैसे टिका हुआ हुआ हैए इसको हिला दियाए तब से ये खंभा हवा में ही झूल रहा हैण्
इस मंदिर में इष्टदेव भगवान शिव के क्रूर रूप वीरभद्र हैंण् वीरभद्र महाराज दक्ष के यज्ञ के बाद अस्तित्व में आए थेण् इसके अलावा यहां भगवान शिव के अन्य रूप अर्धनारीश्वरए कंकाल मूर्तिए दक्षिणमूर्ति और त्रिपुरातकेश्वर भी मौजूद हैंण् यहां विराजमान माता को भद्रकाली कहा जाता हैण्
कुर्मासेलम की पहाडियों पर बना ये मंदिर कछुए की आकार में बना हैण् कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण विरुपन्ना और विरन्ना नाम के दो भाइयों ने 16वीं सदी में कराया थाए जो विजयनगर के राजा के यहां काम करते थेण् हालांकि पौराणिक मान्यता है कि इस मंदिर को ऋषि अगस्त्य ने बनवाया थाण् मंदिर के पास ही एक नंदी की प्रतिमा भी है ण्
मान्यताओं के अनुसारए इस मंदिर का जिक्र रामायण में भी मिलता है और ये वही जगह हैए जहां जटायु रावण से युद्ध करने के बाद जख्मी होकर गिर गये थे और राम को रावण का पता बताया थाण्
मंदिर में एक बड़ा सा पैर का निशान भी हैए जिसे त्रेता युग का गवाह माना जाता है। कोई इसे भगवान राम के पैर का निशान तो कोई माता सीता के पैर का निशान मानते हैं

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