मानवता की मिसाल हैं बैंकाक के थेवन तिवारी
परिवेश Aug 09, 2021 at 01:55 PM , 550---- शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
समूची दुनिया में मानवता कहें या मानवीय संवेदना, इसका पाठ सही अर्थों में भारतीय मनीषियों ने ही दुनिया के सामने रखा है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद से लगायत महात्मा गांधी तक अनेकानेक ऐसे नाम इसके उदाहरण है। इसी क्रम में यदि बैंकाक में रहने वाले भारतीय मूल के थेवन तिवारी का नाम लें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। श्री तिवारी के कार्य-व्यवहार को नजदीक से देखें तो ऐसा लगता है कि इनका समूचा व्यक्तित्व ही मानवता को समर्पित है। इनके अंदर मानवीय संवेदना को अपने और अपने इर्द-गिर्द बनाए रखने का एक जुनून है। हर क्षण ये लोगों को इसकी सही परिभाषा बताने-समझाने-अपनाने को आतुर रहते हैं। इसके लिए वो किसी भी हद तक जाने को भी तैयार रहते हैं। इतिहास साक्षी है कि इंसान और इंसान से महान इंसान बनाने के जो मूल गुण माने गए है उनमें मनुष्य का अपने जन्मस्थान और अपने लोगों के प्रति आवश्यक निर्धारित धर्म के प्रति जवाबदेह होना सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है। नेपाल की सीमावर्ती इलाके में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के भावनीगढ़ गाँव के मूल निवासी श्री थेवन तिवारी के अंदर भी अपनी माटी और अपने लोगों के प्रति जो ललक दिखाई देता है वो उन्हे न केवल औरों से अलग करता है बल्कि मानवता के प्रतिमूर्ति के तौर पर स्थापित करता है। बैंकाक में रहने वाला भारतीय समाज खासकर उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ उनका समर्पण और इनके प्रति इन लोगों का आदरभाव उन्हे आदरणीय से पूजनीय की श्रेणी में ला खड़ा करता है। बैंकाक में रहने वाले अधिकांश भारतीय इनके कार्य व्यवहार से स्वयं को ऋणी महसूस करते हैं। उनका मानना है कि साधु-संतों के भेष में तो बहुतेरे कर्मयोगी देखे गए है लेकिन सामान्य इंसान के रूप में थेवन जी जैसे विरले ही हैं। समूची दुनिया में तबाही मचाने वाले कोरोना वायरस ने पिछले वर्ष जब बैंकाक को अपने आगोश में लिया तो थेवन जी, जिस तरह से बिना किसी जाति-धर्म-क्षेत्र के आम लोगों की मदद के लिए आगे आए वो इंसानियत के लिए मिसाल है। लोगों को दवा दिलवाने, वैक्सीन लगवाने, भोजन करवाने, अस्पताल की सुविधा मुहैया कराने से लेकर मानसिक संबल देने तक में श्री थेवन ने लोगों की हर संभव मदद की। इनके इन्ही प्रयासों से न जाने कितनी जिंदगियाँ असमय काल के गाल में समाने से बच गईं और कितने ही घर उजड़ने से बच गए। दिन-रात उनके इस कार्य में थेवन जी के कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षण जिस तरह से उनकी धर्मपत्नी ने सृजन कर्ता स्त्री धर्म का पालन किया वो भी किसी मायने में इनसे कमतर नहीं है। मानव धर्म के साथ-साथ लोक कल्याणकारी आध्यात्म में भी श्री थेवन का पूरा यकीन है। पूर्व में थाईलैंड के बैंकॉक स्थित विष्णु मंदिर के नवीनीकरण में भी उनका बहुत बड़ा सहयोग रहा है। बैंकाक में कम समय में ही अपेक्षाकृत अधिक लोकप्रिय हो चुके न्यूज पोर्टल इंडो-थाई न्यूज के संस्थापक और मैनेजिंग एडिटर पवन मिश्र का मानना है कि मैने अपनी अभी तक की जिंदगी में श्री थेवन जी जैसा शख्स नहीं देखा। इंसान के लिबास में वो भगवान सरीखे हैं। सच्चाई तो ये है कि ऐसी अद्भुत शख्सियत पर महज पवन जी जैसे एक इंसान को नहीं बल्कि समूची मानवता को फक्र है और होना भी चाहिये।































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