अदभुत विवाह : आम और जामुन के वृक्षों का विवाह
परिवेश Jul 25, 2021 at 11:37 AM , 872विवाह मानव समाज में वंश बेल की वृद्धि के लिए सदियों से चली आ रही एक परम्परा है . कुछ आदिवासी समाज में वर्षा के लिए मेढक मेढकी का विवाह भी कराया जाता है . कही कुत्तों का भी विवाह कराया जाता है . लेकिन जब बात पेड़ों की शादी की हो तो हैरानी होना स्वाभाविक है, लेकिन ऐसा हुआ है उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले की तहसील पटियाली के गांव बीनपुर में. यहां एक पर्यावरण प्रेमी ने दो पेड़ों की शादी कराई है. पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पिछले दिनों एक शुभ मुहूर्त में प्रातःकाल आम और जामुन के पेड़ों को वैवाहिक बंधन में बांधा गया. खास बात यह कि दोनों पेड़ों के विवाह की रस्में हिंदू रीति रिवाज के अनुसार हुई हैं. बीनपुर गाँव के लोग बराती और घराती बने.
आम और जामुन के पेड़ों की शादी गांव बीनपुर निवासी ओमप्रकाश द्विवेदी ने कराई है. वेद विद्वान पंडित अनिल कुमार मिश्रा ने हिंदू रीति रिवाजों के अनुसार मंत्रोच्चारण करते हुए पेड़ों के विवाह की रस्मों को पूरा कराया. इस अनूठी शादी को देखने के लिए गाँव के अलावा क्षेत्रीय लोग उमड़े. जिसको भी इसकी जानकारी मिली, वह इस शादी का साक्षी बनने के लिए उत्सुक दिखाई दिया. ओमप्रकाश द्विवेदी बताते हैं कि 10 वर्ष पूर्व उन्होंने अपनी सौ बीघा जमीन में आम का एक बाग लगाया था. बाग लगाते समय यह संकल्प लिया था कि जब बाग में खूब फल फूल आने लगेंगे तो पेड़ों का विवाह कराएंगे. यह भी संकल्प लिया था कि जिन पेड़ों की शादी कराएंगे उन पेड़ों को मान पक्ष को दान करेंगे. इसी संकल्प को पूरा करते हुए उन्होंने पिछले दिनों एक शुभ मुहूर्त में आम और जामुन के पेड़ों की शादी कराई. इसी के साथ उन्होंने अपने बहन, बहनोई को दोनों पेड़ दान कर दिए.
विधि विधानपूर्वक विवाह संपन्न होने के बाद आयोजक ने ब्राह्मण को दान दक्षिणा दी. पर्यावरण प्रेमी ओमप्रकाश द्विवेदी ने वैवाहिक समारोह संपन्न होने के बाद अपनी बहन संतोष कुमारी और बहनोई विजय शंकर को दोनों पेड़ दान कर दिए.
जिस तरह वैवाहिक समारोह में भोज की परंपरा होती है, उस परंपरा को पेड़ों की शादी में भी निभाया गया. आयोजक ने शादी में पहुंचे रिश्तेदारों और ग्रामीणों को पेड़ों के वैवाहिक समारोह संपन्न होने के बाद सहभोज भी कराया. कासगंज क्षेत्र में यह शादी चर्चा का विषय बनी हुई है .
पर्यावरण विशेषज्ञ दिवाकर वशिष्ठ कहते हैं कि पेड़ों की शादी की परंपरा सबसे अधिक राजस्थान में है. क्योंकि वहां पेड़ों की संख्या कम है, इसलिए वहां के पर्यावरण प्रेमी काफी लंबे समय से विधि विधानपूर्वक पेड़ों की शादी कराते हैं और शादी के बाद यह संकल्प लेते हैं कि उनका कटान नहीं होने देंगे. यह पेड़ समाज को समर्पित हैं. राजस्थान में पेड़ों की शादी के साथ साथ तालाबों की प्राण प्रतिष्ठा की भी परंपरा है. कासगंज में यह अनूठा प्रयास पर्यावरण संरक्षण को बेहतर संदेश दे रहा है.
पेड़ों की शादी कराने वाले ओम प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि मैंने देखा है कि तेजी से पेड़ों का कटान हो रहा है, लेकिन लोगों का पौधरोपण की ओर ध्यान नहीं है. इससे पर्यावरण को खतरा हो रहा है और मुझे यह भी जानकारी हुई थी कि पेड़ों की शादी कुछ जगह लोग कराते रहे हैं. इसलिए जनमानस को पौधरोपण और पर्यावरण का संदेश देने के लिए यह आयोजन कराया है.































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