अदभुत खेंट पर्वत : जहाँ रहती हैं परियां

परिवेश , 2035

अमरेन्द्र सहाय अमर
 आपने अपने बचपन में भूत-प्रेत और परियों की कहानियां तो बहुत सूनी होगी इसमें से कुछ काल्पनिक और कुछ मनगढ़ंत होती है, पर आज हम आपको खैट पर्वत के परियों की कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं .
उत्तराखंड के टिहरी जिले के फेगुल पट्टी में स्थित थात गांव से 4-5 किमी0 की पैदल दूरी तय करने के पश्चात खैटखाल के नाम से जाने वाले इस मन्दिर की अपनी ही कुछ मान्यता है. यह मन्दिर रहस्यमयी शक्तियों के लिए पूरे उत्तराखंड में प्रसिद्ध है.
इस मन्दिर में पूजी जाने वाली नौ देवियां ‘आंछरी-भराड़ी’  यानि परियों के नाम से जानी जाती हैं. कहा जाता है की ये नौ देवियां बहने हैं और आज भी ये अदृश्य शक्तियों के रूप में वहीं स्थित रहती है. इन परियों की पूजा करने आये श्रद्धालुओं के लिए वहां धर्मशालाएं बनायी गयी है. कुछ बातें इस रहस्य को खुद ही बयान करती है जैसे की उत्तराखंड में अनाज को कूटने के लिए जो ओखली होती है वो वहां पर जमीन पर नहीं बल्कि दिवारों पर बनी है. और यहां पर कई तरह की फसलें और फल होते हैं परन्तु वो सारी चीजें वहीं तक इस्तेमाल करने लायक होती है और वहां के परिसर के बाहर वे चीजें निरूपयोगी हो जाती हैं.
कहा जाता है की इन आछरियों यानि परियों को जो लोग पसन्द आ जाते हैं वो उनको मूर्छित कर अपने साथ ले जाती है और  अपने लोक में शामिल कर लेती हैं. इन्हीं सब बातों के कारण इस मंदिर की अपनी ही विशेषताएं हैं और ऐसी ही अन्य शक्तियां उत्तराखंड में आज भी मौजूद है. यहां पर आज भी देवताओं का वास है तभी तो उत्तराखंड की भूमि को देव भूमि कहा जाता है
उल्टी ओखली, में पीड़ी पर पर्वत  पर स्थित मां भराड़ी के मंदिर से कुछ दूरी पर “लुक्की पिडी” में पीड़ी पर्वत पर और भी बहुत रहस्यमयी जगह है जैसे कि गर्भजोन गुफा जिसका कोई अंत नहीं है
 इस स्थान की कई मान्यताएं है कुछ लोग कहते है कि मधु कैटभ वध के समय माता रानी के शेर की दहाड से धरती फट गयी थी.
यहां पर शिव, पार्वती, गणेश भगवान की प्रतिमायें है जो खोजबीन को दौरान मिट्टी में दबी मिली और साथ ही एक शिवलिंग भी मिला. माना जाता है कि यहीं पर रावण ने भगवान शंकर की तपस्या की थी.
चोखुंडू चोतरू एक मैदान रूपी जगह है और माना जाता है कि यहां पर रात में आछरियां यानि परियाँ खेल खेलती है.
यहाँ पर एक गुफा है जहां पर बहुत भूलभुलैया के रूप में प्रसिद्ध है .
इस गुफा के अंदर पत्थर पर नाग देवता के बहुत सारे प्रतिबिंब बने है. यहाँ हर वर्ष भागवत कथा का आयोजन होता है. इस भागवत कथा में हजारो की तादाद में श्रद्धालु भाग लेते हैं. यहां से लोग प्रसाद रूप में नैर थुनेर लेकर जाते हैं .नैर-थुनैर दो अलग-अलग वृक्ष है. इनकी  पत्तियां बहुत खुशबूदार होती है. इसी वजह से पिडी के जंगल में एक सुन्दर सी महक चलती रहती है. लोग इन पत्तियों का इस्तेमाल सुखा कर हवन इत्यादि, मैं करते हैं. यह वृक्ष पूरे भारत में बहुत ही कम स्थानो पर मिलते हैं. वाकई खेंट पर्वत अपनी रहस्यमय स्थितियों के लिए अभूत प्रसिद्ध है .

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