गेहूं का न्यूनतम समर्थन रुपया 1975.00प्रति कुंतल निर्धारित किया गया

जनपत की खबर , 573

लखनऊ।

 रबी विपणन वर्ष 2021-22 
केअंतर्गत प्रदेशमें खाद्य एवं रसद विभाग व  अन्य क्रय  एजेंसियों 6000क्रय केंद्र स्थापित कर मूल्यसमर्थन योजना केअंतर्गत सीधेकिसानों से गेहूं की ख़रीद की जा रही है ।1.इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन रुपया   1975.00प्रति कुंतल निर्धारित   किया गया है
2.   01 अप्रैल 2021 से प्रदेशकेसभी जनपदों में  गेहूँ की ख़रीद प्रारंभ हो गई है प्रदेश में अब तक  कुल 4.92 लाख मीट्रिक  टनगेहूं की ख़रीद की गई है तथा94590 किसानों को समर्थन मूल्य योजना का लाभप्रदान कराया  गया है जबकि गत वर्ष इस अवधि तक प्रदेश में कुल 53,679 .17 मीट्रिकटन गेहूं की ख़रीद कर  लगभग 39000किसानों को   ही लाभान्वित किया गया था था।3.प्रदेशमें वर्तमान  समयमें भी समस्त कर एजेंसियों  के  क्रय केंद्र संचालित है तथा केंद्रों  परकिसानों से सुचारु रूपसे गेहूं की ख़रीद की जा रही है खाद्य विभाग ,(130531.95mt), पीसीएफ(211494.40mt) ,   (यू पी एस एस ,(44475.20mt)    यू  पी पी सी यू (61008.88mt) , एस एफ सी (13357.10mt),मंडीपरिषद (13720.96mt), व  भारतीय खाद्य निगम द्वारा ( 17883.55mt).    इस प्रकार कुल 492471.43 mt ख़रीद की गई है.।4. ख़रीद हेतु अब तक 7,11,865 किसानों द्वारा अपनापंजीकरण ऑनलाइन  करा लिया है। 5. किसानों की सुविधा के लिए इस वर्ष ऑनलाइन टोकेन की व्यवस्था की गई है जिसके अंतर्गत कोई भी  किसान पंजीकरण  के समय या पंजीकरण  के बाद भी अपने  गाँव से संबद्ध नज़दीकी क्रय केंद्र पर  गेहूं बिक्री हेतु अपनी सुविधानुसार  टोकेन प्राप्त कर सकते हैं अब तक 1,38858 किसानों द्वारा  ऑनलाइन टोकेन प्राप्त  किया है जिनसे  क्रय केंद्रो पर  ख़रीद की जा रही है यदि कोई  किसान बिना टोकेनप्राप्त किए ही केंद्र पर गेहूं लाताहै तो उसका भी गेहूं ख़रीद कर लिया जाएगा। 6. कोविड-19,  महामारी से बचाव केलिए क्रय केंद्रों  परपर्याप्त सावधानी बरतने  के निर्देशदिए गए हैं , क्रय केंद्र पर साबुन पानी , सेनिटाइज़र , थर्मामीटर व  ओक्सी मीटर इत्यादि की व्यवस्था  सुनिश्चित किए जाने की संबंध भी  निर्देशनिर्गत किए गए हैं ख़रीद के समय केंद्रों परकिसानों व स्टाफ़की  सुरक्षाकी  दृष्टि से सोसल डिस्टन्सिंग व कोविड प्रोटोकोल का पालन कराया जा रहा है। 7.किसानो की सुविधा के लिये क्रय केंद्र पर बैठनेके स्थान , छाया व पीने के पानी आदि की समुचित व्यवस्थाएँ की गयी हैं।

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