गोरखपुर में भाजपा की पदयात्रा से सियासी शक्ति प्रदर्शन, नितिन नवीन ने संभाली कमान

जनपत की खबर , 32

**‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान का आगाज, सीएम योगी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर साधा निशाना**
 
**गोरखपुर।** उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने गोरखपुर में ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बुधवार को पहली बार गोरखपुर पहुंचे। यहां महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अभियान का शुभारंभ हुआ। इस दौरान नितिन नवीन ने पदयात्रा की कमान संभाली।
 
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी के राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें कई बार अलग-अलग पदों के माध्यम से राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास किया। वर्ष 2004 में सांसद, 2007 में पार्टी महासचिव, 2013 में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी अमेठी से भी चुनाव हार गए।
 
सीएम योगी ने कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा, न्याय यात्रा और अधिकार यात्रा पर भी निशाना साधा। उन्होंने इन अभियानों को राहुल गांधी की राजनीतिक लॉन्चिंग का प्रयास बताते हुए कहा कि इनका अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि राहुल गांधी 56 वर्ष के हो चुके हैं, लेकिन कांग्रेस उन्हें अब भी युवा नेता के रूप में प्रस्तुत कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी युवावस्था तो पहले ही गुजर चुकी है और अब उनकी राजनीतिक लॉन्चिंग संभव नहीं है।
 
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता का भरोसा जीतने के लिए काम करना पड़ता है, केवल बहाने बनाने और आरोप लगाने से विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस और उसके सहयोगियों को काम करने का अवसर मिला, तब उन्होंने उपलब्धियों के बजाय विवादों को जन्म दिया और चुनावी हार के बाद एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे।
 
भाजपा की इस पदयात्रा और जनसभा को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल में पार्टी के राजनीतिक अभियान को गति देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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