*गोरखनाथ मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्थापित हुआ कलश, योगी आदित्यनाथ ने की मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना*

जनपत की खबर , 45

*शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन गोरक्षपीठ में गूंजे मां भगवती के जयकारे, आरती कर विश्व कल्याण की कामना की*

*आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना के साथ शुरू हुआ नवरात्रि का अनुष्ठान, श्रद्धा और भक्ति में लीन हुए श्रद्धालु*

गोरखपुर। आदिशक्ति मां दुर्गा की उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन रविवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित श्री दुर्गा मंदिर में विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापना की गई। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कलश स्थापना के साथ नवरात्रि के धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने जगज्जननी मां भगवती के प्रथम स्वरूप देवी शैलपुत्री की पूजा-अर्चना कर आरती उतारी और समस्त संसार के कल्याण, सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना की।

नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और नवदुर्गा के नौ स्वरूपों में प्रथम हैं। उनकी पूजा से भक्तों को शक्ति, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा मिलती है। इसी आस्था के साथ गोरखनाथ मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां भगवती के चरणों में श्रद्धा निवेदित करते हुए लोकमंगल की प्रार्थना की।

शारदीय नवरात्रि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रमुख पर्व है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त उपवास, जप, ध्यान और पूजा-अर्चना के माध्यम से मां भगवती की आराधना करते हैं। नवरात्रि का पर्व शक्ति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश भी देता है।

गोरक्षपीठ की परंपरा में धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष स्थान है। नवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रहता है। कलश स्थापना को नवरात्रि के अनुष्ठान की महत्वपूर्ण शुरुआत माना जाता है। इसके माध्यम से भक्त मां भगवती का आह्वान कर नौ दिनों तक चलने वाली पूजा-अर्चना का संकल्प लेते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां शैलपुत्री की आरती कर सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मां भगवती की उपासना के इस पावन अवसर पर विश्व कल्याण और जनमानस के मंगल की प्रार्थना के साथ शारदीय नवरात्रि के धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत हुई।

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