**खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने में जुटी यूपी सरकार, 10 नई परियोजनाओं को मंजूरी की संस्तुति**

जनपत की खबर , 19

  **12 निवेश प्रस्तावों पर हुई समीक्षा, 10 को सशर्त स्वीकृति की सिफारिश; किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने पर जोर**
 
**लखनऊ, 1 सितंबर।** उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादों का अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। उप मुख्यमंत्री **केशव प्रसाद मौर्य** ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उपज को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि **विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत के निर्माण में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की अहम भूमिका होगी।**
 
उप मुख्यमंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि **उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023** के तहत उद्यमियों को मिलने वाली सुविधाओं, अनुदानों और प्रोत्साहनों की व्यापक जानकारी पहुंचाने के लिए प्रभावी जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक उद्यमी खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश करें, जिससे किसानों की उपज को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके।
 
### **12 प्रस्तावों का हुआ परीक्षण**
 
इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग **बी.एल. मीणा** की अध्यक्षता में खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय में उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत गठित एप्रेजल समिति की बैठक हुई।
 
बैठक में पोर्टल पर प्राप्त नवीन निवेश प्रस्तावों का परीक्षण किया गया। समिति के समक्ष कुल **12 नए निवेश प्रस्ताव** रखे गए। विस्तृत परीक्षण और विचार-विमर्श के बाद इनमें से **10 परियोजनाओं को आवश्यक शर्तों की पूर्ति के अधीन स्वीकृति के लिए संस्तुति** प्रदान की गई।
 
### **कैटल फीड से लेकर फ्रोजन फूड तक परियोजनाएं**
 
स्वीकृति के लिए संस्तुत परियोजनाओं में खाद्य प्रसंस्करण की विभिन्न गतिविधियां शामिल हैं। इनमें **कैटल फीड, अनाज एवं रिफाइंड मसाले, मूंगफली प्रसंस्करण, फ्रोजन एवं अन्य खाद्य उत्पाद, रेडी-टू-कुक उत्पाद, तेल-आटा-दाल-बेसन निर्माण, दाल मिल तथा फ्रोजन फ्रूट्स एवं वेजिटेबल प्रोसेसिंग** जैसी इकाइयां शामिल हैं।
 
कुछ परियोजनाओं में इकाइयों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए **सोलर पावर प्लांट स्थापित करने** का भी प्रस्ताव है। इससे खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
 
### **किसानों से स्थानीय स्तर पर कच्चा माल खरीदने पर जोर**
 
एप्रेजल समिति ने संस्तुत परियोजनाओं में निर्धारित शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इनमें **स्थानीय किसानों से कच्चे माल की खरीद**, आवश्यक प्लांट मैप, फायर एवं प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रमाण-पत्र, उत्पादन क्षमता के उपयोग, विद्युत बिल और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराना शामिल है।
 
समिति ने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं को नीति के अनुरूप निर्धारित शर्तों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
 
### **एक प्रस्ताव निरस्त, दूसरे पर अगली बैठक में होगा विचार**
 
बैठक में एक निवेश प्रस्ताव को अभिलेखों के आधार पर पात्रता पूरी न होने के कारण **निरस्त** कर दिया गया। वहीं, एक अन्य प्रस्ताव में प्लांट एवं मशीनरी से संबंधित आवश्यक विवरण उपलब्ध नहीं होने के कारण उस पर तत्काल निर्णय नहीं लिया गया। संबंधित विवरण उपलब्ध कराए जाने के बाद इस प्रस्ताव को **आगामी एप्रेजल समिति की बैठक में विचार** के लिए रखने का निर्णय लिया गया।
 
### **गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही दूसरी किस्त पर विचार**
 
समिति ने यह भी निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत प्रथम किस्त प्राप्त करने वाली संस्थाओं या इकाइयों को **द्वितीय किस्त तभी निर्गत/अवमुक्त करने पर विचार किया जाए, जब संबंधित इकाइयां आरओएफसी के माध्यम से अपने उत्पाद का परीक्षण कराकर उसकी परीक्षण आख्या उपलब्ध कराएं।**
 
### **निवेश बढ़ने से किसानों और युवाओं को मिलेगा लाभ**
 
सरकार का मानना है कि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में निवेश बढ़ने से कृषि उत्पादों का स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन होगा। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
 
खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा नीति-2023 के तहत प्राप्त निवेश प्रस्तावों के **समयबद्ध परीक्षण और आवश्यक अनुमोदन की प्रक्रिया लगातार जारी** है। सरकार का लक्ष्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश को बढ़ाकर कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, किसानों की आय में वृद्धि करना और प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

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