उत्तराखंड में बारिश का कहर: फ्लैश फ्लड ने थल-मुनस्यारी मार्ग बहाया, जान जोखिम में डालकर नाला पार कर रहे लोग
जनपत की खबर Aug 17, 2026 at 06:45 AM , 13पिथौरागढ़ में ला-झेकला के पास सड़क का बड़ा हिस्सा बहा, आवाजाही ठप; तेज बहाव के बीच फंसे लोगों की मुश्किलें बढ़ीं
पिथौरागढ़, 17 अगस्त। उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश के बीच प्राकृतिक आपदा का खतरा बढ़ता जा रहा है। पिथौरागढ़ जिले के थल-मुनस्यारी मार्ग पर ला-झेकला के पास अचानक आई फ्लैश फ्लड ने सड़क का एक हिस्सा बहा दिया, जिसके बाद मार्ग पर आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो गई है। ताजा घटनाक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं।
तेज बारिश के बाद ला-झेकला नाले में अचानक पानी का बहाव बेहद तेज हो गया। पानी के साथ मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर भी बहते दिखाई दिए। इससे थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग का हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर आवागमन के लिए बाधित हो गया। इससे पहले 14 अगस्त को भी इसी क्षेत्र में बादल फटने के बाद ला-झेकला नाले के रौद्र रूप लेने की सूचना सामने आई थी। उस समय किसी जनहानि की खबर नहीं थी।
सड़क टूटी तो नाला बना रास्ता
मार्ग बाधित होने के बाद कई लोग दूसरी ओर जाने के लिए तेज बहाव वाले नाले को पार करने का जोखिम उठाते दिखाई दे रहे हैं। सामने आए वीडियो में लोग पानी के तेज बहाव के बीच सावधानी से आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में जरा-सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।
स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि थल-मुनस्यारी मार्ग पहाड़ी क्षेत्र में आवागमन का महत्वपूर्ण रास्ता है। सड़क के क्षतिग्रस्त होने से स्थानीय निवासियों, यात्रियों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
मलबे और बोल्डरों ने बढ़ाई चुनौती
फ्लैश फ्लड के दौरान तेज बहाव के साथ भारी मलबा और बोल्डर सड़क तक पहुंच गए। सामने आए दृश्यों में पानी की भयावह रफ्तार साफ दिखाई दे रही है।
पिथौरागढ़ और मुनस्यारी क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण पहले से ही भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। ऐसे में सड़क मार्गों पर आवाजाही करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
प्रशासन के सामने सड़क बहाली की चुनौती
थल-मुनस्यारी मार्ग के इस हिस्से को सुरक्षित तरीके से बहाल करना प्रशासन और सड़क एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। जब तक क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थिति स्पष्ट रूप से सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक यात्रियों को तेज बहाव वाले नाले को पार करने से बचना बेहद जरूरी है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पहाड़ों में लगातार बिगड़ते मौसम के बीच कब तक मार्ग बहाल हो पाएगा और प्रभावित लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।
नोट: उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में सड़क के क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि मिलती है, लेकिन इस घटना में किसी जनहानि की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं मिली है।































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