चतुर्थ श्रेणी महिला कार्मिक को बनाया मतदान अधिकारी प्रथम वास्तविक बीमार कार्मिक चुनाव ड्यूटी को लेकर परेशान कर रहे कार्यालयों की परिक्रमा

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के0के0शुक्ला/हरिशंकर मिश्र 
लखीमपुर खीरी। हो रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लगभग हर विभाग के कार्मिकों की ड्यूटी लगाई गई है उनमें जो लोग अपनी किसी अक्षमता वश ड्यूटी करने में असमर्थ हैं यथा विकलांग बीमार प्रसव के नजदीक महिलाएं आदि या जिन लोगों की ड्यूटी गलत लग गई है वह अपनी ड्यूटी कटवाना या सही कराना चाहते हैं वह सीडीओ ऑफिस सहित अपने विभागीय कार्यालय की परिक्रमा कर रहे हैं। बताते हैं कि सीडीओ आफिस में अधिकारी ही 3 बजे के बाद आते हैं और शायद खानापूर्ति के लिए वहां पर उनसे एप्लीकेशन ले ली जाती है और उसमें जो भी कारण वह लोग दिखाते हैं उस पर अधिकारियों के द्वारा टीका टिप्पणी की जा रही है तथा उनके साथ अभद्रता पूर्वक व्यवहार किया जाता है। जो लोग बीमारी बता दिखा रहे हैं उनमें फर्जीवाड़े को पकड़ने के लिए मेडिकल बोर्ड की व्यवस्था की गई है जहां बीमार लोगों को वास्तविकता की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड भेजा जाता है परन्तु मेडिकल बोर्ड के द्वारा दी जाने वाली रिपोर्ट जनता को दूर सम्बन्धित को भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में जो लोग वास्तविक बीमार हैं उन्हें यह पता नहीं चल रहा है कि उन्हें ड्यूटी करनी है या नहीं ? बताते हैं कि ऐसे समय में तमाम से लोग फर्जी बीमार बन जाते हैं इसमें फर्जी के चक्कर में वह लोग संघर्ष कर रहे हैं जो सच में बीमार हैं जिनका लंबे समय से इलाज आदि चल रहा है। अधिकारियों द्वारा कहा जा रहा है कि आपको बीमारी हैं इसका मतलब आप अपनी अपनी ड्यूटी या नौकरी पर नहीं जा रहे हैं नौकरी कैसे कर पा रहे हैं जब आप चुनाव की ड्यूटी नहीं कर पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अधिकारियों को यह समझ क्यों नहीं आ रहा है कि ड्यूटी और चुनाव ड्यूटी में फर्क है? बहुत से लोगों की ड्यूटी तैनाती स्थल से बहुत दूर लगी है और वह बीमार हैं या ऐसा कोई अन्य कारण है कि वह ड्यूटी को सही ढंग से अंजाम नही दे सकते उन लोगों को चुनाव मे कैसे ड्यूटी करेंगे ? जो बीमार हैं उनका इलाज चल रहा है हां वह चुनाव की ड्यूटी के लिए अपने आप को ठीक महसूस नहीं कर पा रहे हैं या अपनी जान पर जोखिम नहीं उठाना चाह रहे हैं इसीलिए वह सीडीओ के ऑफिस जाकर अनुरोध कर रहे हैं। चर्चा है कि वहां पर अधिकारियों द्वारा टीका टिप्पणी कर लोगों की बीमारियों का भी मजाक बनाया जा रहा है और लोगों को यह बताया नहीं जा रहा है कि उनकी ड्यूटी कटेगी या नहीं? क्या लोगों की जान से बढ़कर उनकी चुनाव में ड्यूटी है। क्या यह उचित है कि बीमार लोगो का मजाक उड़ाया जाए व उनके साथ अभद्रता पूर्वक व्यवहार किया जाए। जो स्त्रियां गर्भवती हैं या जिनका हाथ पैर या शरीर का कोई अंग टूट गया है प्लास्टर चढ़ा हुआ है उनको भी मेडिकल बोर्ड भी भेजा जा रहा है जो कार्मिक लगभग 58 साल की उम्र के करीब हैं साथ ही किसी बीमारी से भी पीड़ित हैं या किसी बीमारी से ग्रसित हैं उनके पास पहुंच रहे हैं जिनसे अधिकारियों द्वारा यह कहा जा रहा है कि अगर आपकी ड्यूटी काटी गई तो 15 अप्रैल को आपको मैसेज या कॉल के द्वारा आपको बता दिया जाएगा अन्यथा आप को पंचायत चुनाव में ड्यूटी करनी है। अधिकारियों के व्यवहार को देखते हुए सच में बीमारियों से संघर्ष कर रहे लोग दुविधा में पड़ सोचने को विवश हो गए हैं कि उन्हें पंचायत चुनाव ड्यूटी से राहत मिलेगी या नहीं।  यहां पर जिम्मेदारों की कार्यशैली भी उल्लेखनीय है जिन्होंने चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों की भी ड्यूटी बतौर मतदान अधिकारी तक उनका उच्च पद दिखाकर लगा दी है। वह लोग भी प्रार्थना पत्र लिए ड्यूटी सही कराने हेतु मारे मारे घूम रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में फूलबेहड़ ब्लाक की एक महिला चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शशिबाला को सहायक अध्यापक लिखकर निर्वाचन में बतौर मतदान अधिकारी प्रथम की ड्यूटी लगाकर प्रशिक्षण भी दिलवा दिया। महिला कार्मिक अपनी ड्यूटी सही कराने के लिए प्रार्थना पत्र देते घूम रही है परन्तु कहीं सुनवाई नही हो रही है। ऐसे मामलों में इसे साफ्टवेयर की त्रुटि बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जा रहा है।

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