*वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी मण्डलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों के साथ साप्ताहिक बैठक संपन्न*
जनपत की खबर Apr 22, 2026 at 07:30 PM , 27*जनगणना के प्रथम चरण में हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेन्सस 22 मई से 20 जून 2026 के मध्य*
*प्रथम चरण से पहले एनुमरेटर्स और सुपरवाइजर्स का प्रशिक्षण हर हाल कराएं पूर्ण*
*07 मई से 21 मई के मध्य उत्तर प्रदेश में लोग ऑनलाइन भर सकेंगे स्व-गणना (Self Enumeration) फार्म*
*व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को ऑनलाइन स्व-गणना प्रपत्र भरने के लिए किया जाए प्रोत्साहित*
*अभियान चलाकर गो-आश्रय स्थलों के लिए आवश्यकतानुसार दान एवं क्रय के माध्यम से भूसा किया जाए संग्रहित*
*सभी जिलाधिकारी शीघ्र ही जिला स्तर पर हीट एक्शन प्लान करें तैयार*
*गर्मी के मौसम को देखते हुए सार्वजनिक स्थानों पर आवश्यकतानुसार प्याऊ किए जाएं स्थापित*
*गो-आश्रय स्थलों पर स्वच्छ पेयजल व पर्याप्त छाया की हो व्यवस्था*
*दिनांकः 22 अप्रैल, 2026*
*लखनऊः* मुख्य सचिव श्री एस.पी.गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी मण्डलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
प्रदेश के मुख्य सचिव श्री एस.पी.गोयल ने *जनगणना-2027* की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे इस महत्वपूर्ण कार्य की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करें। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण, जिसमें हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेन्सस शामिल है, 22 मई से 20 जून 2026 के मध्य होगा, इससे पहले एनुमरेटर्स और सुपरवाइजर्स का प्रशिक्षण हर हाल में पूर्ण कराया जाए। प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहने वाले कर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। हाउस लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएशन का शेष कार्य अगले दो दिनों पूरा किया जाए। जनगणना संचालन की प्रभावी निगरानी के लिए सीएमएमएस पोर्टल का उपयोग किया जाए।
मुख्य सचिव ने बताया कि स्व-गणना प्रक्रिया के तहत नागरिक स्वयं अपने परिवार का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को ऑनलाइन स्व-गणना प्रपत्र भरने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि डेटा की शुद्धता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि नोडल संस्था उपाम के नेतृत्व में तैयार विस्तृत आउटरीच प्लान को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। इसके तहत छोटे वीडियो और पिक्चर कोलाज तैयार कर सोशल मीडिया पर नियमित रूप से साझा किए जाएं, ताकि जन-जागरूकता बढ़े, फील्ड गतिविधियों को प्रमुखता मिले और पूरे प्रदेश में बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। उन्होंने जिला एवं मंडल स्तर पर व्हाट्सएप समूह बनाकर समस्याओं के त्वरित समाधान और संसाधनों के कुशल प्रबंधन पर भी जोर दिया। साथ ही प्रशिक्षण, फील्ड विजिट और बैठकों जैसी गतिविधियों को भी सार्वजनिक रूप से साझा करने के साथ-साथ #censusup, #census2027 और जिला-विशेष हैशटैग का उपयोग किया जाए।
उन्होंने जिला जनगणना सेल को डीआईओ-एनआईसी और डीईएसटीओ के साथ मिलकर जिला कंट्रोल रूम के रूप में सक्रिय करने के निर्देश दिए। शहरी क्षेत्रों में सेल्फ एनुमरेशन को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में जनभागीदारी कम है, वहां जिला स्तर पर हेल्पलाइन स्थापित कर लोगों को जोड़ा जाए। सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे डीसीओ प्रतिनिधि के साथ समन्वय कर अपने क्षेत्र में चार्जेस की संख्या और उनसे जुड़ी समस्याओं की समीक्षा करें तथा उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में *गो-आश्रय स्थलों* का सुदृढ़ संचालन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान चलाकर वर्ष पर्यन्त के लिए आवश्यकतानुसार दान एवं क्रय के माध्यम से भूसा एकत्रित कर अस्थायी रूप से खरही, कूप, खोप में सुरक्षित रखा जाए। दीर्घकालिक व्यवस्था के लिए स्थायी भूसा बैंकों की स्थापना की जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि गो-आश्रय स्थलों में उपलब्ध गोबर से तैयार खाद किसानों को उपलब्ध कराकर उसके बदले भूसा प्राप्त किया जा सकता है, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
उन्होंने चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने पर विशेष बल देते हुए निर्देशित किया कि शत-प्रतिशत क्षेत्र में हाइब्रिड नेपियर घास की बुआई कराई जाए। साथ ही, चारा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गोशाला संचालकों एवं किसानों को प्रशिक्षित कराया जाए।
गर्मी एवं लू से बचाव के मद्देनजर उन्होंने गो-आश्रय स्थलों पर स्वच्छ पेयजल एवं पर्याप्त छाया की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशु शेडों को बोरे/टाट-पट्टी से ढकने तथा आवश्यकतानुसार शीतलन के उपाय अपनाए जाएं। संरक्षित निराश्रित गोवंशों के लिए समुचित चिकित्सा, नियमित टीकाकरण एवं संतुलित भरण-पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी गो-आश्रय स्थलों की निगरानी जनपद स्तर पर स्थापित कमांड कंट्रोल रूम के माध्यम की जाए।
मुख्य सचिव ने *फार्मर रजिस्ट्री* में पंजीकरण कार्य में अपेक्षित प्रगति लाने के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा रबी विपणन वर्ष 2026-27 के दौरान किसानों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए यह निर्णय लिया गया है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेचने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि क्रय केंद्रों पर गेहूं विक्रय के लिए आने वाले किसानों को फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण कराने के लिए किसी भी प्रकार का दबाव न बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण न कराने वाले किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, खाद-बीज सब्सिडी, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) तथा फसल बीमा जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। इसलिए प्रदेश के शत-प्रतिशत किसानों का फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए तथा किसानों को स्वेच्छा से पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित किया जाए।
मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में *हीटवेव* राज्य आपदा के रूप में अधिसूचित है। सभी जिलाधिकारी शीघ्र ही जिला स्तर पर हीट एक्शन प्लान तैयार करें। गर्मी के मौसम को देखते हुए सार्वजनिक स्थानों पर आवश्यकतानुसार प्याऊ स्थापित किए जाएं। साथ ही, हीटवेव के जोखिम और बचाव के उपायों के संबंध में विभिन्न प्रचार माध्यमों के जरिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।
इसके अतिरिक्त, मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश में *ओलावृष्टि, अतिवृष्टि एवं अग्निकांड* से प्रभावित फसलों के लिए लंबित क्षतिपूर्ति धनराशि का जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शीघ्र वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके।
बैठक में *निदेशक, जनगणना संचालन, श्रीमती शीतल वर्मा* ने बताया कि 07 मई, 2026 से 21 मई, 2026 के मध्य उत्तर प्रदेश में लोग स्व-गणना (Self Enumeration) का फार्म भर सकेंगे। एचएलबीसी पोर्टल के अनुसार 31 जिलों में मैपिंग कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुका है, जबकि 33 जिलों में यह कार्य 98 से 99.99 प्रतिशत तक पूरा हो गया है। 7 जिलों में प्रगति 90 से 98 प्रतिशत के बीच है, जबकि 2 जिलों में यह 80 से 90 प्रतिशत के बीच और 2 जिलों में 80 प्रतिशत से कम दर्ज की गई है।
यह भी बताया कि नेशनल ट्रेनर्स, मास्टर ट्रेनर्स और फील्ड ट्रेनर्स का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में लगभग 5.27 लाख एनुमरेटर्स और सुपरवाइजर्स का प्रशिक्षण 15 अप्रैल से 5 मई तक संचालित किया जा रहा है, जिसे समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए गए।
फेज-1 के अंतर्गत एनुमरेटर्स और सुपरवाइजर्स की नियुक्ति, उनका प्रशिक्षण तथा प्रशिक्षण स्थलों, बैचों और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी एसडीएम को दी गई है। इसके साथ ही मानचित्र पर एनुमरेशन ब्लॉक्स, जिन्हें हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स कहा जाता है, का सृजन भी किया जा रहा है। सेल्फ एनुमरेशन के लिए रणनीति तैयार करने का कार्य सीडीओ और जॉइंट मजिस्ट्रेट्स के समन्वय से किया जा रहा है।
बैठक में *अपर मुख्य सचिव पशुधन श्री मुकेश कुमार मेश्राम* द्वारा अवगत कराया गया कि दान द्वारा भूसा संग्रहण में महराजगंज, जौनपुर, बलिया, वाराणसी, एटा, सहारनपुर, शाहजहाँपुर, लखीमपुर खीरी, चित्रकूट एवं गोरखपुर जनपद अग्रणी हैं। वहीं, क्रय के माध्यम से भूसा संग्रहण में सहारनपुर, देवरिया, वाराणसी, गोरखपुर, मऊ, जौनपुर, बदायूँ, बलिया, मथुरा एवं अलीगढ़ प्रमुख स्थान पर हैं।
जिलाधिकारी जौनपुर द्वारा भूसा दान करने वाले व्यक्तियों को ‘पुण्य की एफडी’ प्रमाण पत्र वितरित किए गए, जो सराहनीय पहल है। इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारी आजमगढ़, बागपत, सहारनपुर एवं हरदोई द्वारा गो-आश्रय स्थलों में वाटर मिस्टिंग सिस्टम, पंखे, कूलर एवं फॉगर्स की विशेष व्यवस्था की गई है। हरदोई एवं इटावा जनपद हरे चारे की बुआई में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
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