Yamanashi Prefecture में रोडशो: ग्रीन हाइड्रोजन पर यूपी–यामानाशी के बीच ऐतिहासिक समझौता

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जापान में यूपी की बड़ी कूटनीतिक-औद्योगिक पहल: ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक पर यामानाशी के साथ ऐतिहासिक समझौता, नेट जीरो लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार

Yogi Adityanath ने जापान के Yamanashi Prefecture में आयोजित रोडशो कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति, प्राकृतिक संपदा और वैश्विक निवेश संभावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य है और प्राकृतिक संसाधनों, उर्वरा भूमि, जल संपदा तथा सांस्कृतिक-आध्यात्मिक विरासत के कारण यह देश की विकास धुरी बन चुका है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रकृति की कृपा यामानाशी पर है, उसी प्रकार उत्तर प्रदेश भी प्रकृति की असीम अनुकंपा से समृद्ध है। इन संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
9 वर्षों में तीन गुना अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय और राज्य की अर्थव्यवस्था तीन गुना बढ़ी है। उन्होंने स्वीकार किया कि जितनी बड़ी संभावनाएं हैं, उतनी ही चुनौतियां भी हैं, लेकिन सरकार ने सुनियोजित रणनीति के साथ विकास को गति दी है।
उन्होंने कहा कि Narendra Modi के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश निरंतर आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक पर ऐतिहासिक एमओयू
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिसंबर 2024 में यामानाशी के राज्यपाल उत्तर प्रदेश की यात्रा पर आए थे और दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई थी। उसी पहल को आगे बढ़ाते हुए अब ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन तकनीक पर उत्तर प्रदेश और यामानाशी के बीच ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने यामानाशी के राज्यपाल एवं हाइड्रोजन ऊर्जा से जुड़े अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता और नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में कदम
इस समझौते के तहत ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक को उत्तर प्रदेश में लागू करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसका उपयोग—
औद्योगिक उत्पादन में
पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रणाली में
ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में
स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने में
किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल भारत के प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित नेट जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
रणनीतिक महत्व
यह समझौता केवल तकनीकी सहयोग नहीं, बल्कि भारत-जापान औद्योगिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं का क्रियान्वयन भारत की ऊर्जा नीति में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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