आईआईएम लखनऊ की रिपोर्ट में ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ को बल: राम मंदिर के बाद अयोध्या में आर्थिक उछाल

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लखनऊ, 17 फरवरी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर विकसित ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ को भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ (आईआईएम लखनऊ) की ताजा अध्ययन रिपोर्ट ने मजबूती दी है।
आईआईएम की रिपोर्ट “इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या” (अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण) में बताया गया है कि राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अध्ययन में मंदिर निर्माण से पहले और बाद की आर्थिक स्थिति का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
मंदिर निर्माण से पहले सीमित थी अर्थव्यवस्था
रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण से पूर्व अयोध्या मुख्यतः एक पारंपरिक तीर्थस्थल तक सीमित थी।
वार्षिक आगंतुकों की संख्या लगभग 1.7 लाख के आसपास थी।
अधिकांश दुकानदारों की औसत दैनिक आय ₹400–₹500 तक सीमित थी।
राष्ट्रीय होटल श्रृंखलाओं की उपस्थिति नगण्य थी।
आधुनिक रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे का अभाव कनेक्टिविटी में बाधक था।
सीमित रोजगार अवसरों के कारण युवाओं का पलायन आम प्रवृत्ति बन चुका था।
अचल संपत्ति बाजार में भी ठहराव था और पर्यटन से राज्य की अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय योगदान नहीं मिल पा रहा था।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद अभूतपूर्व उछाल
जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की आर्थिक तस्वीर में तेज बदलाव दर्ज किया गया।
पहले छह महीनों में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन का उल्लेख।
वार्षिक स्तर पर 5–6 करोड़ आगंतुकों की संभावना।
लगभग ₹85,000 करोड़ की पुनर्विकास परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रगति पर।
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक रेलवे स्टेशन, विस्तारित सड़क नेटवर्क और नगर सौंदर्यीकरण परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा आधारित पहल के माध्यम से अयोध्या को “मॉडल सोलर सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में पहचान
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वर्ष 2025 तक उत्तर प्रदेश में पर्यटन व्यय ₹4 लाख करोड़ से अधिक हो सकता है, जिसमें अयोध्या की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पर्यटन आधारित कर राजस्व ₹20,000–₹25,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।
अयोध्या अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभर रही है, जहां प्रवासी भारतीयों, शोधकर्ताओं और विदेशी श्रद्धालुओं का आगमन बढ़ा है।
आतिथ्य क्षेत्र में निवेश की नई लहर
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ, जिसमें अयोध्या की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही।
प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन।
150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित।
प्रतिष्ठित होटल समूहों—Taj Hotels, Marriott International और Wyndham Hotels & Resorts—ने विस्तार योजनाएं घोषित कीं।
ऑनलाइन बुकिंग में चार गुना वृद्धि।
हस्तशिल्प और धार्मिक स्मृति-चिह्नों की मांग में तेज उछाल।
उद्यमिता और रोजगार में विस्तार
रिपोर्ट के अनुसार:
लगभग 6,000 MSMEs नए स्थापित हुए या पुनः सक्रिय हुए।
अगले 4–5 वर्षों में लगभग 1.2 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन का अनुमान।
छोटे दुकानदारों की दैनिक आय ₹2,500 तक पहुंची।
मंदिर क्षेत्र के आसपास संपत्ति मूल्यों में 5 से 10 गुना वृद्धि।
आस्था से अर्थव्यवस्था तक
अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया है कि धार्मिक विरासत आधारित विकास मॉडल, यदि सुव्यवस्थित निवेश और प्रशासनिक समन्वय के साथ लागू किया जाए, तो वह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन ला सकता है।
अयोध्या का उदाहरण दर्शाता है कि सांस्कृतिक और धार्मिक परियोजनाएं योजनाबद्ध क्रियान्वयन के साथ पर्यटन, रोजगार और निजी निवेश को बढ़ावा देकर बहुस्तरीय आर्थिक विकास का आधार बन सकती हैं।
इस प्रकार, अयोध्या अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रही है।

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