अटल जी एवं सुशासन

राष्ट्रीय , 277

लेखक: राकेश पाण्डेय "निश्छल"

(भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की 101वीं जयंती/जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर)

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ ही ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने अपने विचार, आचरण और कार्यों से देश की राजनीति को नई दिशा दी। भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ऐसे ही महान व्यक्तित्व थे। वे एक कुशल राजनेता, ओजस्वी वक्ता, संवेदनशील कवि और दूरदर्शी प्रधानमंत्री थे। उनकी जयंती को सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाना इस बात का प्रमाण है कि उनका संपूर्ण जीवन सुशासन की मिसाल रहा है।
अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ। वे बचपन से ही राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सेवा भावना से ओत-प्रोत थे। राजनीति में आने से पहले वे एक शिक्षक और पत्रकार भी रहे, जिससे उनकी सोच हमेशा जनहित और सत्य पर आधारित रही। उन्होंने राजनीति को सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का माध्यम माना।
सुशासन का अर्थ
सुशासन का अर्थ है—ऐसी शासन व्यवस्था जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही, न्याय, जनकल्याण और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अटल जी का मानना था कि सरकार जनता की सेवक होती है, शासक नहीं। इसलिए उनके कार्यकाल में नीतियाँ केवल कागजों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आम जन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली बनीं।
अटल जी के शासन में सुशासन की झलक
अटल बिहारी वाजपेयी जी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने, परंतु 1999 से 2004 का उनका कार्यकाल सुशासन का स्वर्णिम काल माना जाता है। इस दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक निर्णय लिए—
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (स्वर्णिम चतुर्भुज)
अटल जी ने देश के चारों कोनों को जोड़ने वाली सड़क परियोजना शुरू की। इससे न केवल यातायात सुगम हुआ, बल्कि व्यापार, उद्योग और रोजगार को भी बढ़ावा मिला। यह विकास का एक मजबूत आधार बना।
ग्रामीण भारत पर विशेष ध्यान
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से गांवों को शहरों से जोड़ा गया। अटल जी मानते थे कि जब तक गांवों का विकास नहीं होगा, तब तक देश का विकास अधूरा रहेगा।
शिक्षा और विज्ञान में प्रगति
उनके कार्यकाल में शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और विज्ञान के क्षेत्र में नई योजनाएँ शुरू हुईं। उन्होंने युवाओं को सशक्त बनाने पर बल दिया।
परमाणु परीक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा
1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर और सुरक्षित राष्ट्र बनाने का साहसिक निर्णय लिया गया। इसके बावजूद अटल जी ने शांति और संवाद की नीति को कभी नहीं छोड़ा।
विदेश नीति में संतुलन
अटल जी ने “बस यात्रा” के माध्यम से पड़ोसी देश पाकिस्तान से शांति का संदेश दिया। उनका यह कदम दर्शाता है कि वे संघर्ष के बजाय संवाद में विश्वास रखते थे।
अटल जी का व्यक्तित्व और आदर्श
अटल बिहारी वाजपेयी जी का व्यक्तित्व विनम्रता, सहनशीलता और नैतिकता से परिपूर्ण था। वे विपक्ष का भी सम्मान करते थे और लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखते थे। उनके भाषणों में कटुता नहीं, बल्कि तर्क और संवेदना होती थी। एक कवि होने के कारण उनके विचारों में मानवीय भावनाएँ स्पष्ट दिखाई देती थीं।

अटल बिहारी वाजपेयी जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि सुशासन के प्रतीक थे। उन्होंने यह सिद्ध किया कि सशक्त नेतृत्व, ईमानदारी और जनकल्याण की भावना से देश को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। आज उनके जन्म शताब्दी वर्ष पर हमें उनके आदर्शों को अपनाने और एक जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प लेना चाहिए। अटल जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा सुशासन वही है जिसमें “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” निहित हो।

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