पशुओं की सेवा सदैव सुखदाई है

परिवेश , 140

पशुओं की सुरक्षा
देवनाथ मिश्रा 

पशुओं  की   सेवा  सदैव  सुखदाई  है। 
मिलता सबको निश दिन दूध मलाई है।।
कैल्शियम प्रोटीन का स्रोत  पशु ही है। 
सभी  ने  खा  पी, तन्दुरूस्ती पाई है।।

क़ृषि में आर्थिक लाभ मिले सदा इनसे। 
इन्होंने  हल  का  बोझ सदा उठाई है।। 
जैविक खाद इन्हीं पशुओं से मिलता है। 
पद प्राकृतिक खाद की इसने पाईं है।।
 
लेकिन  दर्द  छिपा रहता है आंखों में।
करते  पशु  से लोग  सदा रुसवाई है।।
भूखे प्यासे  सदा  भटकते सड़कों पर। 
ज़ुबां  नहीं पर  चीखें पड़ी  सुनाई है।।

मां  के  पय  से  वंचित  बछड़े रोते  हैं।
वाहन  से  कितनों  ने  जान गंवाई है।।
भक्षण करते मांस बहुत जन पशुओं का।
मनुज नहीं है लगता  क्रूर कसाई  है।।

करें न अत्याचार आज हम पशुओं पर। 
इसमें ही हम सबकी सदा भलाई  है।।

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