सदानंद तत्त्वज्ञान परिषद के आश्रमों पर मनाया गया भगवद अवतरण महोत्सव
अन्य खबरे May 29, 2025 at 08:15 PM , 193लखीमपुर खीरी।
सदानन्द तत्वज्ञान परिषद् के तत्वावधान में मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर ग्राम डिमभौरा में स्थित कल्कि भगवान सदानंद जी धाम आश्रम में भगवद अवतरण महोत्सव धूमधाम से मनाया गया साथ ही संस्था के मुख्यालय पुरुषोत्तम धाम आश्रम, पुरुषोत्तम नगर, सिद्धौर, बाराबंकी में भी कल्कि भगवान सदानन्द जी का अवतरण महोत्सव 24 मई से 28 मई तक पांच दिवसीय महोत्सव के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ।
ज्ञात हो कि सन 1948 ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया के दिन देवरिया जिले के पिपरा भुआल गांव में स्वामी सदानन्द जी परमहंस का अवतरण जन्म हुआ था। उन्होंने सन् 1976 से बिहार के गोपालगंज जिले से आरम्भ करते हुए सत्य सनातन धर्म संस्थापनार्थ भगवान श्री विष्णु - राम - कृष्ण जी की तरह ही अपने समर्पित शरणागत भक्त सेवकों को तत्वज्ञान देकर संसार - शरीर - जीव - ईश्वर - परमेश्वर पांचों का पृथक - पृथक बातचीत के साथ साक्षात् दर्शन कराया एवं विराट परमेश्वर का साक्षात् दर्शन व मुक्ति - अमरता का साक्षात् बोध भी कराया। अतः सन्त ज्ञानेश्वर जी के भक्त सेवक लोग उनको भगवान श्री विष्णु - राम - कृष्ण जी की ही तरह जानते समझते हैं और उनके जन्म दिवस को भगवद अवतरण दिवस के रूप में मुख्यालय पुरुषोत्तम धाम आश्रम सहित अन्य आश्रमों में बड़े ही धूमधाम के साथ प्रति वर्ष मनाते हैं। जिसके लिए उनके भक्त सेवक लोग , अनुयायीजन देश विदेश से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर अपने सदगुरु देव की पूजा अर्चना, भजन कीर्तन भक्ति भाव से करते हैं साथ में उक्त दिन हजारों की संख्या में दीप प्रज्वलित कर झंडारोहण एवं भंडारे का आयोजन भी करते हैं।
इस अवसर पर कल्कि भगवान जी के शिष्य महात्मा दशरथ जी अपना अनुभव साझा करते हुए कहते हैं, "भगवान् को पूरे सृष्टि में कोई नहीं जानता है, जब भगवान स्वयं कृपा करके ज्ञान दृष्टि देकर अपने को जना दिखा देता है तब ही कोई भगवान को यथार्थत: जान लेता है । बचपन में भगवान सदानन्द जी के साथ रहने चलने पर भी मैं उनको नहीं जान पाया था और सामान्य मनुष्य ही समझ रहा था लेकिन जिस दिन उन्होंने कृपा करके मुझे तत्वज्ञान दिया उस दिन मैने देखा कि जिस परमतत्त्वम से यह सृष्टि उत्पन्न हो रहा है चालित संचालित हो रहा है और लय विलय हो रहा है वह परमतत्त्वम तो सन्त ज्ञानेश्वर जी के शरीर के माध्यम से कार्य कर रहा है तब से मैं मित्र होते हुए भी भगवान स्वीकार कर उनके शरण में आ गया।"
पीलीभीत के आविद आलम खान ने बताया, "मैने जब हरिद्वार में हो रहे एक सत्संग कार्यक्रम का पर्चा पाया जिसमें लिखा था रूह नूर अल्लाताला का दीदार कराने वाला कार्यक्रम, तब तो मैने ठान लिया था कि ये स्वामी जी जरूर कोई ठग हैं और लोगों को ठगने आए हैं , क्योंकि हमारे इस्लाम में ये मान्यता है कि कोई अल्लाताला का दीदार करा ही नहीं सकता । इसीलिए मैं हरिद्वार का उस कार्यक्रम में चला गया ताकि वहां से स्वामी जी को भगा सकूं , परन्तु वहां जाने के पश्चात मैं जब स्वामी जी से मिला तो परीक्षण के रूप में भी मुझे दर्शन कार्यक्रम में भाग लेना पड़ा और जब मैने भाग लिया तो क्या देखता हूं वही साक्षात् अल्लाताला स्वामी सदानन्द जी के रूप में मेरे सामने खड़े हैं फिर मैने तत्काल स्वामी जी के चरणों में सिजदा अर्थात साष्टांग दंडवत कर दिया क्योंकि एक मुसलमान अल्लाताला के अलावा किसी को भी सिज़दा नहीं कर सकता । और साक्षात् रूह नूर अल्लाताला का दीदार करने के पश्चात कोई शक मुझमें बाकी नहीं रहा था । और तब से मैं उनके चरणों में समर्पित हूं । इस बात से मेरे मुसलमान समाज से काफी विरोध मिला फिर भी भगवान की कृपा से मुझे कोई डिगा नहीं सका ।"
सदानन्द तत्वज्ञान परिषद् के वर्तमान प्रभारी कमल जी कहते हैं , " सन 2000 से पहले स्वामी जी का एक सत्संग कार्यक्रम में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था, उस कार्यक्रम में स्वामी जी विश्व के सभी धर्म गुरुओं को चुनौती दे देकर ललकारते हुए कह रहे थे कि मैं जीव आत्मा परमात्मा का बातचीत सहित साक्षात् दर्शन कराऊंगा, मेरे पास वही तत्वज्ञान है जो विष्णु राम कृष्ण के पास था और आज के किसी भी धर्म गुरुओं के पास नहीं , जिसे देख सुन कर मैं दंग रह गया था, मुझे लगा ये हस्ती कोई मामूली हस्ती नहीं है , मैने ठान लिया मैं भी जीव ईश्वर परमेश्वर का दर्शन करूंगा अगर मुझे दर्शन होता है तो मैं भी समर्पित हो जाऊंगा और आखिर उन्होंने मुझे दर्शन करा दिया । तब से मैं उनके समर्पित होकर रह चल रहा हूं।"
नेपाल से आए महात्मा दीपक जी कहते हैं, " आज की समय में जहां पूरे दुनिया में संकट व्याप्त है , अज्ञानता के कारण चारों तरफ हाहाकार, हत्या, हिंसा, लुट, चोरी, डकैती, बलात्कार, भ्रष्टाचार आदि बुराई विकृति फैला हुआ है, इसको समूल समाप्त कर समाज में अमन चैन, शांति सुव्यवस्था बहाल करना हो तो एकमात्र भगवान सदानन्द जी के तत्त्वज्ञान रूप विद्यातत्वम पद्धति को स्कूल कॉलेजों में शामिल करना ही होगा । अन्यथा विश्व विनाश की स्थिति में बैठा हुआ है । "
अंत में धर्म की जय हो, अधर्म का विनाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो, सत्य की विजय हो जय घोष के साथ विशाल भंडारे का आयोजन हुआ एवं कार्यक्रम समापन का घोषणा हुआ। इसके अलावा अन्य प्रमुख आश्रमों पर भी हर्षोल्लाह के साथ अवतरण दिवस मनाया गया।



























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