*महराजगंज में सिंचाई विभाग की बड़ी परियोजना का लोकार्पण, किसानों के खिले चेहरे, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया लोकार्पण*

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*# नौतनवा तहसील के रतनपुर गांव में रोहिन नदी पर बना रोहिन बैराज, परियोजना की लागत 14737.98 लाख.*

*#इस खास मौके पर जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह जी, केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी जी के साथ स्थानीय विधायक ऋषि त्रिपाठी भी रहे मौजूद.*


लखनऊ| महराजगंज जिले के नौतनवां में आज सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने रोहिन बैराज परियोजना का विधिवत लोकार्पण किया. इस दौरान प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह जी और केंद्रीय मंत्री पंकज सिंह जी भी मौजूद रहे. रोहिन बैराज परियोजना उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के नौतनवा क्षेत्र में रोहिन नदी पर निर्मित एक महत्वपूर्ण सिंचाई संरचना है। इसका उद्देश्य क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए आवश्यक जल उपलब्ध कराना और कृषि उत्पादन में वृद्धि करना है। गौरतलब है कि रोहिन नदी पर पहले से एक वीयर (weir) मौजूद था, जिसका निर्माण 1947 में किया गया था। यह वीयर 2005 में आई बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे सिंचाई की सुविधाएं बाधित हो गईं। इसके पुनर्निर्माण के लिए 2006 में 6 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली, लेकिन विभिन्न कारणों से कार्य में देरी होती रही। वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 148 करोड़ रुपये की लागत से बैराज निर्माण को मंजूरी दी। नाबार्ड ने इस परियोजना के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान की और रोहिन बैराज का निर्माण कार्य 2022 से आरंभ हुआ! यह बैराज 87मीटर लंबा है, जिसमें सात फाटक लगे हैं। बैराज से 110 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होकर रोहिन की छह नहरों में जाएगा, जिससे लगभग 65 गांवों के 16,000 किसानों को लाभ मिलेगा। इन नहरों की कुल लंबाई 45.363 किलोमीटर है, और इससे 5386 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।    
बैराज के निर्माण से नौतनवा और लक्ष्मीपुर क्षेत्र के किसानों को रबी और खरीफ सीजन में पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध होगा। पहले वीयर के ध्वस्त होने के बाद सिंचाई विभाग नदी को मिट्टी से बांधकर नहरों में पानी पहुंचाता था, जिसमें काफी खर्च और समय लगता था। अब, बैराज के माध्यम से यह प्रक्रिया अधिक सुगम और प्रभावी हो गई है। रोहिन बैराज परियोजना महराजगंज जिले के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सिंचाई सुविधाओं में सुधार करके कृषि उत्पादन को बढ़ावा देगी। इसके निर्माण से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और किसानों की आय में सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद है। 

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