फर्जी भारतीय दस्तावेजों के आधार पर भारत में आवासित कराने वाले को एटीएस ने किया गिरफ्तार

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लखनऊ।


एटीएस उत्तर प्रदेश को आसूचना प्राप्त हो रही थी किअभियुक्त त्रिपुर सुंदरी एक्सप्रेस से अगरतला जाकर बॉर्डर पारकर बांग्लादेश जाने वाला था, जिसे कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन कानपुर में पूछताछ के लिए दिनांक 30.01.2024 को उतारा गया एवं पूछताछ उपरांत गिरफ्तारी की गयी। बरामदगी -

• रूपये 6040/- नकद,

• भारतीय आधार कार्ड (फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनवाया गया)

• दारुल उलूम देवबंद मदरसे की आईडी कार्ड

• रेलवे टिकट

• 01 अदद मोबाइल फोन ।

गिरफ्तार अभियुक्त की मोडस ओपरेंडी -

अभियुक्त मो. राशिद ने बताया कि वह आठ साल पूर्व अपने बांग्लादेशी पासपोर्ट से टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। यहां आने के बाद देवबंद स्थित मदरसा दारुल उलुम में अपना नाम पता बदलकर दाखिला लिया था। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प. बंगाल के पते का आधार कार्ड बनवा लिया था और वर्ष 2016 से देवबंद में ही रह रहा था। साथ ही अभियुक्त मो. राशिद ने बताया कि पूर्व में गिरफ्तार हुए अभि. शेख नजीबुल हक एवं अबु हुरैरा गाजी से मेरा संबन्ध था। उन्होंने ही मेरा फर्जी आधार कार्ड बनवाकर देवबंद में बसाया था एवं अपने गैंग में सम्मिलित कर लिया था। गैंग द्वारा भारत में अवैध रुप से रह रहे बांग्लादेशियों के कूटरचित भारतीय दस्तावेज बनवाने का कार्य मुझे सौंपा गया था । जिसके बदले में मुझे पैसे मिलते थे। पूर्व में गिरफ्तार बांग्लादेशी अभियुक्त अदिलुर रहमान को भी आर्थिक मदद कर, गैंग ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मेरे सहयोग से पैन कार्ड, आधार कार्ड आदि बनवाए थे। अभियुक्त मो. राशीद ने कई अन्य बांग्लादेशियों के नाम भी बताए हैं जिन्हें इस गैंग के माध्यम से भारत में अवैध रुप से बसाया गया है। बताए गए नामों के संबन्ध में यूपी एटीएस द्वारा जांच की जा रही है।

गिरफ्तार अभियुक्त को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। कुछ व्यक्तियों द्वारा एक सिंडिकेट बनाया गया है, जो अवैध घुसपैठियों को उनकी पहचान छिपाकर, फर्जी भारतीय दस्तावेजों के आधार पर भारत में आवासित कराता है एवं उनको आर्थिक सहयोग कर, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। इस आसूचना को एटीएस उत्तर प्रदेश द्वारा भौतिक एवं इलैक्ट्रॉनिक सर्विलांस के माध्यम से विकसित किया गया। विकसित आसूचना के आधार पर थाना एटीएस उत्तर प्रदेश में मु.अ.स. 12/2023 धारा 120बी, 419, 420, 467, 468, 471, 370 भा.द.वी., धारा 14 विदेशी अधिनियम 1946 व धारा 12 (1), 12(2) पासपोर्ट अधिनियम 1967 पंजीकृत कराया गया, जिसके क्रम में दिनांक 11.10.2023 को तीन, दिनांक 07.11.2023 को दो दिनांक 18.12.2023 को एक एवं 08.01.2024 को एक अभियुक्त गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुकें हैं, जिनके नाम निम्नवत् है -

1) अदिलुर रहमान असरफी पुत्र हबीबुल रहमान असरफी निवासी ढाका, बांग्लादेश । 2) अबु हुरैरा गाजी पुत्र अब्दुल्ला गाजी निवासी नॉर्थ 24 परगना, प. बंगाल ।

3) शेख नजीबुल हक पुत्र शेख अब्दुल कादिर निवासी 24 परगना साउथ, प. बंगाल । 4) तानिया मंडल पुत्री खालिक मंडल मूल निवासी पिरोजपुर, बांग्लादेश ।

5) इब्राहिम खान पुत्र मन्नान खान मूल निवासी बांग्लादेश ।

6) मोहम्मद अब्दुल अव्वल पुत्र मोती-उर-रहमान निवासी जनपद गोलपारा, आसाम । 7) अबू सालेह मंडल पुत्र ओदुद मंडल भिकुटिया, थाना स्वरुपनगर, नार्थ 24 परगना, पश्चिम बंगाल

गिरफ्तार अभियुक्त का नाम एवं पता -

मो० राशिद अहमद सरदार (उम्र 28 वर्ष) पुत्र अब्दुल खालिक सरदार उर्फ अब्दुल कासिम सरदार निवासी पंगास्खली दक्षिण 24 परगना पं.बंगाल (आधार में अंकित) ।

हाल पता - कमरा नं. 10 अफ्रीकी मंजिल दारुल उलूम देवबंद सहारनपुर उ.प्र. । वास्तविक पता- ग्राम मंदारी थाना लक्ष्मीपुर जिला लक्ष्मीपुर चटगांव बांग्लादेश ।
अभियुक्त त्रिपुर सुंदरी एक्सप्रेस से अगरतला जाकर बॉर्डर पारकर बांग्लादेश जाने वाला था, जिसे कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन कानपुर में पूछताछ के लिए दिनांक 30.01.2024 को उतारा गया एवं पूछताछ उपरांत गिरफ्तारी की गयी। बरामदगी -

• रूपये 6040/- नकद,

• भारतीय आधार कार्ड (फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनवाया गया)

• दारुल उलूम देवबंद मदरसे की आईडी कार्ड

• रेलवे टिकट

• 01 अदद मोबाइल फोन ।

गिरफ्तार अभियुक्त की मोडस ओपरेंडी -

अभियुक्त मो. राशिद ने बताया कि वह आठ साल पूर्व अपने बांग्लादेशी पासपोर्ट से टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। यहां आने के बाद देवबंद स्थित मदरसा दारुल उलुम में अपना नाम पता बदलकर दाखिला लिया था। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प. बंगाल के पते का आधार कार्ड बनवा लिया था और वर्ष 2016 से देवबंद में ही रह रहा था। साथ ही अभियुक्त मो. राशिद ने बताया कि पूर्व में गिरफ्तार हुए अभि. शेख नजीबुल हक एवं अबु हुरैरा गाजी से मेरा संबन्ध था। उन्होंने ही मेरा फर्जी आधार कार्ड बनवाकर देवबंद में बसाया था एवं अपने गैंग में सम्मिलित कर लिया था। गैंग द्वारा भारत में अवैध रुप से रह रहे बांग्लादेशियों के कूटरचित भारतीय दस्तावेज बनवाने का कार्य मुझे सौंपा गया था । जिसके बदले में मुझे पैसे मिलते थे। पूर्व में गिरफ्तार बांग्लादेशी अभियुक्त अदिलुर रहमान को भी आर्थिक मदद कर, गैंग ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मेरे सहयोग से पैन कार्ड, आधार कार्ड आदि बनवाए थे। अभियुक्त मो. राशीद ने कई अन्य बांग्लादेशियों के नाम भी बताए हैं जिन्हें इस गैंग के माध्यम से भारत में अवैध रुप से बसाया गया है। बताए गए नामों के संबन्ध में यूपी एटीएस द्वारा जांच की जा रही है।

गिरफ्तार अभियुक्त को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है।

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