अदभुत विवाह : मृत लडके लड़कियों का विवाह
परिवेश Feb 21, 2021 at 10:40 AM , 680दुनिया के हर समाज में शादियों का ख़ास महत्व होता है. मानव सभ्यता के साथ ही यह नियम भी बनाया गया है कि शादी के बाद क़ानूनी तौर पर एक स्त्री और पुरुष एक साथ रह हैं और वंश वृद्धि का काम करते हैं.. भारत में बिना शादी किये साथ रहना पाप माना जाता है. इसलिए यहाँ शादी का बहुत ज्यादा महत्व होता है. एक निश्चित उम्र पार कर जाने के बाद हर व्यक्ति की शादी होती है.
हर माँ-बाप की इच्छा होती है कि उसका बेटी या बेटी शादी करके घर बसाये और ख़ुशी-ख़ुशी अपना जीवन यापन करे. लेकिन हर माँ बाप की यह इच्छा पूरी नहीं हो पाती है. कुछ बदनसीब माँ-बाप के बेटे शादी के पवित्र बंधन में बंधने से पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह देते हैं. ऐसे में माँ-बाप के दिल पर क्या बीतती है, इसके बारे में बताने की जरुरत नहीं है. भारत एक पारम्परिक देश है और यहाँ तरह-तरह की परम्परा देखने को मिलती है.
आज हम आपको एक ऐसे अनोखे गाँव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहाँ सदियों से एक अद्भुत परम्परा निभाई जा रही है. उत्तर प्रदेश के मेरठ के उलधन गाँव में नटों का पुराना गाँव हैं. ये लोग रस्सी पर चलने की कलाबाजी दिखाने में माहिर हैं. इस गाँव में एक अनोखी परम्परा का पालन आज भी किया जाता है. इस गाँव के लोग अपने मरे हुए बच्चों का विवाह जीवित लोगों की तरह करते हैं. इन लोगों को मानना है कि ऐसा करने से उनके बच्चों की आत्मा को शांति मिलेगी और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी. नटों के इस समुदाय के अनुसार ऐसा करने के बाद मृतक को दूसरी दुनिया में सभी कष्टों से मुक्ति मिल गयी होगी.
बात सन 2018 की है. यहां पर करीब 21 साल पहले स्वर्ग सिधार गए चार बच्चों की शादी धूमधाम से की गई. इसमें दो लड़कियां थीं और दो लड़के. दुल्हा-दुल्हन की जगह मृतक बच्चों की फोटो रखी गईं और उनका पूरा पूरा श्रंगार किया गया. बाकायदा बारात निकाली गई और दावत नाच-गाना भी हुआ. मौत के वक्त बच्चों की उम्र पांच और छह साल थी.
उल्धन गांव की मंढैया में नट बस्ती है. बस्ती में बुधवार को अनोखी शादी हुई. यहां के राजबीर की बच्ची रूपा का निधन करीब 21 साल पहले पांच वर्ष की उम्र में हो गया था. राजबीर के पड़ोसी मुनेश की बेटी पायल की मृत्यु भी इसी दौरान हुई थी. दूसरी ओर, भावनपुर के आलमपुर गांव निवासी गोविंदा और अक्षय के पुत्र का मौत भी छह साल की उम्र में हो गई थी. बुधवार को आलमपुर गांव से बाराती दोनों मृत बच्चों के फोटो को दूल्हे की तरह सजाकर मंढैया पहुंचे. यहां दोनों बच्चियों के परिवारों में शादी की रश्में निभाई गईं. ढोल और डीजे का इंतजाम किया गया था और पंडाल लगाकर दावत की भी व्यवस्था की गई थी. पूरी बस्ती के साथ रिश्तेदारों को भी इसमें आमंत्रित किया गयाथा. चढ़त हुई तो बाराती दोनों बच्चों के फोटो पर सेहरा लगाकर पहुंचे. वहीं बच्चियों के फोटो दुल्हन के रूप में सजाकर शादी की रस्में पूरी की गईं. इसके बाद बारातियों और रिश्तेदारों ने भोज ग्रहण किया.
कई सालों से चल रही है परंपरा.
जब दोनों परिवारों के मुखिया से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमारे यहां यह सालों से यह परंपरा चली आ रही है. जब किसी बच्चे की मौत हो जाती है तो उसके बालिग होने पर उनकी इलाके की मृत बच्चियों से शादी की जाती है. इसके लिए लड़कियों की तलाश दुल्हन की तरह ही की जाती है.
बारात में शामिल बुजुर्गों का कहना है कि यह परंपरा काफी समय पहले से चली आ रही है. वे ऐसा इसलिए करते हैं क्यों कि उनका मानना है कि बचपन में भगवान को प्यारे होने वाले बच्चे हमेशा उनके साथ रहते हैं. उनकी शादी भी उसी उत्सुकता से इंतजार किया जाता है जितना कि जिंदा लोगों की शादी का. इसकी तैयारी भी काफी समय पहले सी होती है.































Comments