अकाल मृत्यु की ओर जा रही आदि गंगा गोमती
अन्य खबरे Feb 04, 2021 at 10:52 PM , 423मोहम्मदी-खीरी। लखनऊ की लाइफ लाइन कही जाने वाली जिसका रामायण में भी उल्लेख है ऐसी पौराणिक आदि गंगा के नाम से विख्यात गोमती धीरे-धीरे अकाल मृत्यु की ओर बढ़ रही है। वह गोमती जो पूरे वर्ष भर सदानीरा रहती थी पिछले 2 वर्षों से गोमती की धारा अवरुद्ध हो कर रुक रही है और कई जगह नदी बिल्कुल सूख रही है। ऐसा नहीं है कि गोमती को बचाने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। मोहम्मदी क्षेत्र में सेव गोमती संगठन के माध्यम से युवा लगातार लोगों को गोमती बचाने के लिए जागृत कर रहे हैं, लेकिन सरकार की अनदेखी के चलते उनके प्रयास भी सार्थक नहीं हो पा रहे हैं। मोहम्मदी विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह भी गोमती को शारदा से जोड़ने की मांग मुख्यमंत्री के समक्ष उठा चुके हैं लेकिन अब तक उनकी मांग पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
आदि गंगा के नाम से विख्यात गोमती नदी जो जिला पीलीभीत के माधोटांडा के पास गोमद ताल से निकलती है तथा पूरनपुर होती हुई जिला शाहजहांपुर में प्रवेश करती है। इसके बाद जिला खीरी में काफी लंबी दूरी तय करके सीतापुर होती हुई गोमती लखनऊ पहुंचती है। इसी गोमती के किनारे नैमिषारण्य जैसा पवित्र स्थान स्थित है। जहां कि देश विदेश के लोग आते हैं। लेकिन गोमद ताल से निकलने के बाद काफी दूरी तक तो गोमती नदी बिल्कुल लुप्त अवस्था में है। अतिक्रमण का आलम यह है कि लोग गोमती को जोत कर उस पर खेती कर रहे हैं। जिला खीरी में भी गोमती का यही हाल है। अधिकतर स्थानों पर गोमती का प्रवाह बिल्कुल अवरुद्ध है, जगह-जगह अवैध बालू खनन तथा गोमती के डूब क्षेत्र में उसके किनारों तक अतिक्रमण के चलते न तो गोमती में पानी है और न प्रवाह। गोमती एक गंदे नाले की तरह दिखती है। वर्ष 2018 में मोहम्मदी तहसील में कई स्थानों पर गोमती नदी बिल्कुल सूख गई थी। कुछ ऐसी स्थिति वर्ष 2019 व 20 में भी थी, अब भी गोमती का प्रवाह बिल्कुल अवरुद्ध है। ऐसा नहीं है कि गोमती को बचाने के लिए लोग जागरूक न हो। लोगों की आस्था गोमती के साथ जुड़ी है, मोहम्मदी क्षेत्र में सेव गोमती संगठन के माध्यम से मनदीप सिंह, सतपाल सिंह, अजय बाजपेई जैसे तमाम युवा समय-समय पर वृक्षारोपण गोमती यात्रा जैसे कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को गोमती बचाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। लेकिन उन्हें सरकार और सरकारी अधिकारियों का कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। गोमती के सूखने का एक कारण यह भी है कि गोमती में मिलने वाले तमाम छोहे और नाले जो प्राकृतिक रूप से गोमती में जलस्तर को बढ़ाते थे अवैध अतिक्रमण के द्वारा उनको खत्म कर दिया गया है। वहीं अवैध खनन के चलते गोमती के प्राकृतिक जल श्रोत खत्म हो चुके हैं। जगह-जगह गोमती में गहरे गड्ढे बनाकर बालू निकाली जा रही है, जिससे गोमती की धारा अवरुद्ध हो रही है। अगर समय रहते उचित उपाय न किए गए तो लखनऊ की लाइफ लाइन कही जाने वाली आदि गंगा गोमती जो हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है अकाल मौत मर जाएगी।
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विधायक लोकेन्द्र प्रताप भी लगा चुके हैं मुखिया से गुहार
मोहम्मदी विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह भी गोमती को बचाने के प्रति काफी चिंतित हैं 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गोमती को शारदा से जोड़ने की मांग की थी। उन्होंने पत्र में कहा था कि अगर गोमती को शारदा से जोड़ दिया जाए और शारदा का जल गोमती में प्रवाहित किया जाने लगे तो जिले को शारदा की भयंकर बाढ़ से मुक्ति मिलेगी और गोमती में भी लोगों को आचमन के लिए जल उपलब्ध हो सकेगा। लेकिन अभी तक प्रदेश सरकार ने विधायक के इस पत्र और प्रस्ताव पर कोई कार्यवाही नहीं की है।
गोमती किनारे अतिक्रमण पर अधिकारी नहीं देते ध्यान
एक तरफ सरकार एंटी भू माफिया पर कार्रवाई के माध्यम से तमाम जमीन भू माफियाओं से खाली कराने की बात करती है। वहीं दूसरी गोमती नदी के डूब क्षेत्र और धारा तक लोगों ने फसलें बो रखी हैं। जहां तमाम दवाइयों का प्रयोग होता है जो गोमती के पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव डालता है। वही अवैध खनन व गोमती की धारा पर अतिक्रमण के चलते गोमती लुप्त होने के कगार पर पहुंच रही है और जिले के आला अधिकारी और तहसील के अधिकारी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। गोमती के किनारे कहीं पर भी अवैध अतिक्रमण पर कोई कार्यवाही आज तक नहीं की गई है।
सिर्फ कहानियों में रह जायेगी आदि गंगा
फिलहाल अगर गोमती की दुर्दशा पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, शासन प्रशासन ने समय रहते गोमती की चिंता नहीं की तो धीरे-धीरे गामती नदी का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा, आदि गंगा गोमती मृत्यु को प्राप्त हो जाएगी और इसका खामियाजा लखनऊ जौनपुर जैसे बड़े शहरों को भुगतना पड़ेगा। हम भी अपनी आने वाली पीढ़ियों को सिर्फ कहानियों में ही सुनाया करेंगे कि गोमती नामक एक नदी हुआ करती थी जो हमारे क्षेत्र से होकर बहती थी।



























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