अदभुत चट्टान: गुप्तखजानोंवाला चट्टान  

हेडलाइंस , 1087

अमरेन्द्र सहाय अमर 
वैज्ञानिकों ने 4,000 साल पुरानी प्राचीन पत्थर की कलाकृति का रहस्य सुलझाने का दावा किया है. उनका कहना है कि पत्थर पर बने रहस्यमयी निशान असल में किसी 'गुप्त खजाने' का नक्शा हो सकते हैं.वैज्ञानिक इसमें बनी नक्काशी के छिपे रहस्य को जानने में लगे हुए थे वैज्ञानिकों ने 4,000 साल पुरानी प्राचीन पत्थर की कलाकृति का रहस्य सुलझाने का दावा किया है. उनका कहना है कि पत्थर पर बने रहस्यमयी निशान असल में किसी 'गुप्त खजाने' का नक्शा हो सकते हैं.'सेंट-बेलेक स्लैब' के नाम से जाने जाने वाले इस कांस्य युग के पत्थर की पहचान शोधकर्ताओं ने 2001 में यूरोप के सबसे पुराने मानचित्र के रूप में की थी. तभी से वह इसमें बनी नक्काशी के छिपे रहस्य को जानने में लगे हुए थे.  एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस में खोए हुए स्मारकों की खोज के लिए वैज्ञानिक अब स्लैब को 'खजाने का नक्शा' मान रहे हैं. वेस्टर्न ब्रिटनी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर यवान पालर ने कहा, 'पुरातात्विक स्थलों को खोजने के लिए मानचित्रों का उपयोग करना एक अच्छा कदम हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा, 'यह एक खजाने का नक्शा है.हालाँकि, शोधकर्ताओं को इस मानचित्र को पूरी तरह से समझने में लगभग 15 साल लग सकते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि यह नक्शा लगभग 30 किमी x 21 किमी के क्षेत्र को चिह्नित करता है, जिसका अर्थ है कि उस क्षेत्र का सर्वेक्षण करने और फिर उसे खोजने में बहुत समय लगेगा. सीएनआरएस रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर यवन पेलर और उनके सहयोगी क्लेमेंट निकोलस उस टीम का हिस्सा थे जिसने 2014 में स्लैब को फिर से खोजा था.
रहस्यमय चट्टान के रहस्यों को समझने के लिए फ्रांस और दुनिया भर के विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ भी पेलोर और निकोलस के साथ शामिल हुए. शोधकर्ताओं ने कहा कि सेंट-बेलेक स्लैब में बोल्ड राहतें और रेखाएं हैं जो पेरिस से लगभग 500 किलोमीटर पश्चिम में ब्रिटनी क्षेत्र के हिस्से राउडुअलेक में नदियों और पहाड़ों को दर्शाती हैं. पत्थर पर छोटे-छोटे गड्ढे भी हैं, जिनके बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि यह कब्रगाह या निवास का संकेत देते हैं.
यह पत्थर पहली बार 1900 में फ्रांस में खोजा गया था, लेकिन फिर 2017 तक महल के तहखाने में पड़ा रहा. इस पर बने रहस्यमयी निशान चार हजार साल तक रहस्य बने रहे. बाद में शोधकर्ताओं ने इस पत्थर पर बने रहस्यमय निशानों को समझने के लिए अध्ययन करना शुरू किया. आख़िरकार अब उन्हें सफलता मिल गई है.

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